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चंडीगढ़ 10 Feb । नेशनल डी-वर्मिंग डे के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार कृमि संक्रमण से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर जानकारी साझा करेंगे। उन्होंने बताया कि विश्व की 25 प्रतिशत से अधिक आबादी आज भी किसी न किसी प्रकार के कृमि संक्रमण से प्रभावित है, जिसमें सबसे अधिक मामले विकासशील देशों में सामने आ रहे हैं। यह स्थिति खासतौर पर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। डॉ. नीरज कुमार के अनुसार खराब स्वच्छता, कुपोषण और एनीमिया के कारण बच्चों में कृमि संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हुकवर्म (अंकुश कृमि) संक्रमण के मामलों में बच्चों में खून की कमी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक विकास प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देशों में इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अब भी यह संक्रमण व्यापक रूप से फैला हुआ है। विशेष रूप से भूमध्य रेखा से 30 से 45 डिग्री अक्षांश के बीच के क्षेत्रों में हुकवर्म संक्रमण अधिक पाया जाता है, जहां गर्म और नम जलवायु इसके फैलाव के लिए अनुकूल होती है। वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि दुनिया भर में कृमि संक्रमण के मामले करीब 70 से 90 करोड़ के बीच आंके गए हैं। वहीं, हुकवर्म से होने वाले एनीमिया के कारण हर वर्ष लगभग 5,000 से 6,000 लोगों की मौत होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चे इस संक्रमण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। यदि समय रहते रोकथाम और उपचार न किया जाए तो यह बीमारी बच्चों में रोगग्रस्तता और मृत्यु दर को बढ़ा सकती है। डॉ. नीरज कुमार ने स्वच्छता अपनाने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और समय-समय पर कृमिनाशक दवाओं के सेवन को इस समस्या से निपटने का प्रभावी उपाय बताया।