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कई कमिश्नर बदले, लेकिन वर्षों से बिल्डिंग ब्रांच में सेटिंग बरकरार
लुधियाना 10 फरवरी : नगर निगम में बड़े साहिब का तबादला हो चुका है, मगर विभिन्न -जोनों की बिल्डिंग ब्रांच में सील बिल्डिंगों का गोरखधंधा अभी भी जारी है ! नियम साफ कहते हैं कि अवैध निर्माण पर सील लगाने की कार्रवाई असिस्टेंट टाउन प्लानर (एटीपी) करता है, लेकिन सील खुलवाने की शक्ति केवल नगर निगम कमिश्नर के पास होती है। इसके बावजूद राजेताओं ,छूट भइए नेताओं , मिडिया कर्मियों की मितलिभगत भ्र्ष्टाचार और निजी स्वार्थों को अंजाम देते हुए बिना कमिश्नर की मंजूरी के ही सील अनसील का खेल खुलमखुला चल रहा है। यहां हालात यह हैं कि कौन-सी बिल्डिंग की सील खोली गई, किसकी सील तोड़ी गई और किस पर सिर्फ दिखावे की सील लगाई गई — इसकी जानकारी सिर्फ इलाके के राजनेता ,एटीपी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर तक सीमित रहती है। जब किसी भवन की सील गैरकानूनी तरीके से खुलती है तो इंस्पेक्टर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है और मामला सुर्ख़ियों में आने पर इल्जाम छोटे अधिकारीयों पर डाल गाज उन पर गिरा दी जाती है ! पिछले एक महीने में हैबोवाल जस्सियां रोड, जोशी नगर, डीएमसी के सामने शमशानघाट रोड, प्रीत सिनेमा के सामने तीसरी मंजिल पर बने शैड वाली बिल्डिंग और घुमारमंडी स्थित सेठी डिपार्टमेंटल स्टोर सहित कई निर्माण बॉयलाज उल्लंघन पर सील किए गए थे। लेकिन अब हकीकत यह है कि जस्सियां रोड और जोशी नगर की सील दुकानें दोबारा खुल चुकी हैं और डीएमसी रोड पर गेट खोलकर फिर से निर्माण शुरू हो गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एमटीपी तक को इसकी जानकारी नहीं दी गई। कारण साफ है— डी-जोन में सीलिंग और डी-सीलिंग दोनों काम एटीपी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर अपने स्तर पर कर रहे हैं। न कोई दफतरी रिकॉर्ड रखा जा रहा है और न ही सील तोड़ने वालों पर पुलिस में एफआईआर भेजी जा रही है। शिकायत आने पर सीधा कह दिया जाता है कि “सील नहीं खोली गई”, और पूरा खेल दबा दिया जाता है। सील सिर्फ दिखावे की, काम अंदर पूरा प्रीत सिनेमा के सामने जिस बिल्डिंग में तीसरी मंजिल पर अवैध शैड बन रहा था, वहां कार्रवाई के नाम पर केवल ग्राउंड फ्लोर का एक साइड गेट सील किया गया। जबकि तीसरी मंजिल तक जाने के लिए दूसरा रास्ता खुला छोड़ दिया गया। कुछ ही दिनों में उसी रास्ते से अवैध निर्माण पूरा कर लिया गया और बाहर से दिखाने के लिए ताले पर सील आज भी लगी हुई है। ऐसा ही मामला घुमारमंडी स्थित सेठी डिपार्टमेंटल स्टोर का है। निगम ने बेसमेंट का फ्रंट गेट सील कर दिया, लेकिन अंदर से जाने का रास्ता खुला है और बेसमेंट का कमर्शियल इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। कागजों में बेसमेंट सील है, जबकि हकीकत में वहां रोजाना कारोबार चल रहा है। एमटीपी की नाक के नीचे खेल पूरे डी-जोन में यह गोलमाल एमटीपी की नाक के नीचे चल रहा है। नियमों का खुला उल्लंघन, सीलिंग का कोई रिकॉर्ड नहीं, और सील तोड़ने वालों पर एक भी एफआईआर नहीं — यह सीधे तौर पर निगम के सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। अब सवाल यह है कि नगर निगम में सीलिंग कार्रवाई जनता को गुमराह करने के लिए है या फिर अवैध निर्माण कराने वालों से सेटिंग का जरिया बन चुकी है? अगर समय रहते उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो डी-जोन में भ्रष्टाचार का यह खेल और भी बेलगाम होता जाएगा।