Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
महाशिवरात्रि पर रणकेश्वर महादेव मंदिर में जुटे नतमस्तक हुआ सीएम सहित शीर्ष नेता , ऐतिहासिक धरोहर में गूंजी शिवभक्ति धुरी 15 फरवरी : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री रणकेश्वर महादेव शिव मंदिर, रणीके में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के निमंत्रण पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंदिर में नतमस्तक हुए। नेताओं ने भगवान शिव का विधिवत रुद्राभिषेक किया और हवन यज्ञ में पूर्णाहुति अर्पित की। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। ऐतिहासिक महत्वता यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि महाभारतकालीन ऐतिहासिक धरोहर भी माना जाता है। मान्यता है कि कौरवों द्वारा पांडवों को सूई की नोक जितनी भूमि देने से इंकार करने के बाद यहीं पर युद्ध की व्यूह रचना तैयार की गई थी। सुलह के सभी प्रयास विफल होने पर पांडवों ने इसी स्थल पर सात अक्षौणी सेना एकत्रित की और भगवान श्रीकृष्ण के साथ मिलकर भगवान शिव की आराधना की। इसी कारण इसका नाम ‘रणकेश्वर’ पड़ा—रण अर्थात युद्ध और केशव अर्थात श्रीकृष्ण। यहाँ पांडु पुत्र अर्जुन ने की थी तपस्या कथाओं के अनुसार, पांडु पुत्र अर्जुन ने यहीं भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और अर्जुन को अद्वितीय शस्त्र ‘गांडीव’ प्रदान किया। कुरुक्षेत्र के लिए यहीं से प्रस्थान और विजय की मान्यता के कारण इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था विशेष रूप से जुड़ी है। महाशिवरात्रि पर मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक गौरव और जनभावना का यह संगम आयोजन को विशेष बना गया।