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स्वर्गीय अमित अरोड़ा की प्रेरणा से जगरांव में आंखों के दान की मिसाल

कर भला हो भला संस्था ने दिखाई मानवता की राह, कई परिवार बने रहे प्रेरणा
-चरणजीत सिंह चन्न- जगरांव/यूटर्न/15/फरवरी। समाज सेवा के क्षेत्र में कर भला हो भला संस्था के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय अमित अरोड़ा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच और सेवा की रोशनी आज भी सैकड़ों जिंदगियों को उजाला दे रही है। कम उम्र में ही एक हादसे के दौरान हुए उनके निधन निधन पर परिवार पर दुखों का पहाड़ तो जरूर टूटा लेकिन इस दुखद घड़ी में भी उनके परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार ने उनके द्वारा शुरू की गई संस्था कर भला हो भला को उसी समर्पण और सेवा भाव से आगे बढ़ाया। जानकारी के मुताबिक स्वर्गीय अमित अरोड़ा के निधन के बाद उनके परिवार की ओर से उनके अंतिम संस्कार से पूर्व उनकी आंखें दान की गईं। यह आंखें आई हॉस्पिटल को सौंपी गईं, ताकि किसी जरूरतमंद को दुनिया देखने का अवसर मिल सके। इसके अलावा अमित अरोड़ा के भोग अवसर पर उनकी स्मृति में अमित अरोड़ा पुनर्जोत आई बैंक सोसाइटी नामक संस्था का गठन किया गया। इस अवसर पर जगरांव शहर के 178 लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए अपनी आंखें दान करने के फॉर्म भरे, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल रही। अमित अरोड़ा की इसी प्रेरणा से शनिवार को जगरांव के फ़िली गेट निवासी बुजुर्ग राजकुमार कपूर के निधन के बाद उनके परिवार ने भी कर भला हो भला संस्था के मार्गदर्शन में उनकी आंखें दान कीं। संस्था के सदस्यों के आग्रह पर शंकर आई हॉस्पिटल की टीम जगराओं–लुधियाना जीटी रोड से सीधे राजकुमार कपूर के घर पहुंची, जहां पूरी प्रक्रिया पूरी कर उनकी आंखें दान करवाई गईं। इस पुनीत कार्य से किसी अन्य व्यक्ति को फिर से दुनिया देखने का अनमोल अवसर मिल सका। आंखें जलाने से बेहतर है किसी की दुनिया रोशन करना- इस मौके पर कर भला हो भला संस्था के अध्यक्ष रोहित अरोड़ा और अन्य सदस्यों ने कहा कि मरणोपरांत आंखें दान करने से बड़ा कोई दान नहीं होता। आंखें जलने से अच्छा है कि वे किसी जरूरतमंद के काम आएं और कोई अन्य व्यक्ति उन्हीं आंखों के माध्यम से इस रंगीन दुनिया को देख सके।रोहित अरोड़ा ने यह भी बताया कि यदि अब कोई अन्य व्यक्ति भी अपनी आंखें दान करना चाहता है, तो वह कर भला हो भला समिति से संपर्क कर अपने आंखें दान करने के फॉर्म भरवा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग आंखें दान करने का संकल्प लें, तो कई अंधेरी जिंदगियों में फिर से उजाला लौट सकता है।