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चंडीगढ़ 23 Feb । हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ हुए वित्तीय लेनदेन में पाई गई अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जानकारी दी कि विभागीय स्टेटमेंट और बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में अंतर पाए जाने के बाद 18 फरवरी को ही बैंक को तत्काल प्रभाव से डि-एमपैनल कर दिया गया। साथ ही जमा धनराशि को ब्याज सहित राष्ट्रीयकृत बैंक में ट्रांसफर करने के निर्देश जारी किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का पूरा पैसा सुरक्षित है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 फरवरी को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने सेबी को पत्र लिखकर अपने कुछ कर्मचारियों द्वारा गड़बड़ी की आशंका जताई और आंतरिक जांच शुरू की। इस बीच राज्य सरकार ने भी मामले में एफआईआर दर्ज करवा दी है और जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी गई है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, “एक-एक पैसा वापस लाया जाएगा। दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।” --- ### 📦 **फैक्ट बॉक्स: क्या है पूरा मामला?** * 🔹 **18 फरवरी:** हरियाणा सरकार ने स्टेटमेंट में गड़बड़ी पकड़ते ही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को डि-एमपैनल किया। * 🔹 **सरकारी धनराशि:** बड़ा हिस्सा सावधि जमा (FD) के रूप में निवेशित था। * 🔹 **21 फरवरी:** बैंक ने सेबी को पत्र लिखकर कर्मचारियों की संभावित गड़बड़ी की जानकारी दी। * 🔹 **एफआईआर दर्ज:** मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपी गई। * 🔹 **हाई-लेवल कमेटी:** पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए गठन प्रस्तावित। * 🔹 **सरकार का दावा:** पूरी राशि सुरक्षित, ब्याज सहित राष्ट्रीयकृत बैंक में ट्रांसफर के निर्देश। ---