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अजीत झा. चंडीगढ़ 23 Feb : चंडीगढ़ नगर निगम ने विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अब निगम के हर कार्य के पूर्ण होने के बाद स्वतंत्र एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। इस ऑडिट में यह जांचा जाएगा कि टेंडर में तय शर्तें, मानक और गुणवत्ता वास्तव में जमीन पर लागू हुई या नहीं। म्युनिसिपल कारपोरेशन चंडीगढ़ के कमिश्नर अमित कुमार ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। सदन की पिछली बैठक के बाद अधिकारियों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगम के इतिहास में पहली बार सभी कार्यों का व्यवस्थित थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य किया जा रहा है। क्यों लिया गया फैसला? निगम के कई टेंडरों में अनुमानित लागत अधिक होने, पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने और आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा ग्राउंड स्तर पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय पर पूर्णता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इन आरोपों और विवादों को समाप्त करने के लिए निगम ने स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से गुणवत्ता परीक्षण कराने का निर्णय लिया है, ताकि कार्यों की निष्पक्ष जांच हो सके। पहले भी उठे थे सवाल शहर में पूर्व में कई मामलों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा है। एक वार्ड में बनी सड़क कुछ ही महीनों में टूट गई थी, जो बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना। इसी प्रकार रायपुर कलां स्थित गोशाला में पशु शव निस्तारण संयंत्र की मशीन छह माह में ही खराब हो गई थी, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हुई थीं।इन घटनाओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। क्या होगा फायदा? • टेंडर शर्तों के अनुपालन की स्वतंत्र जांच • कार्यों की गुणवत्ता का तकनीकी मूल्यांकन • समयबद्धता की समीक्षा • भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक • नागरिकों का भरोसा मजबूत नगर निगम का दावा है कि यह कदम विकास कार्यों में जवाबदेही बढ़ाएगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। अब देखना होगा कि यह नई व्यवस्था जमीन पर कितना प्रभावी साबित होती है और शहर के विकास कार्यों में कितना बदलाव लाती है।