Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
*
*लुधियाना में डॉ. मोहन भागवत का संवाद, सामाजिक समरसता से लेकर नागरिक कर्तव्यों तक रखी स्पष्ट वैचारिक रूपरेखा*
*नवीन गोगना** **लुधियाना, 26 फरवरी ।** राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने अपने तीन दिवसीय पंजाब प्रवास के दौरान लुधियाना में प्रमुख नागरिकों से संवाद करते हुए सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी को केंद्रीय मुद्दा बनाया। कार्यक्रम अरविंदो कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट (SACCM) के ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 800 गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संवाद को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पंजाब सहित देश में बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के बीच डॉ. भागवत ने “समाज के संगठन” को राष्ट्र की शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब समाज बिखरा होता है तो बाहरी शक्तियां हावी हो जाती हैं। इसलिए स्वतंत्र भारत में लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक आधार पर सर्वांगीण विकास होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को संगठित करने का अर्थ भारत के सभी 142 करोड़ नागरिकों को साथ लेकर चलना है—बिना भेदभाव, बिना विभाजन। विभिन्न मत, पंथ और संप्रदायों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मार्ग अलग हो सकते हैं, लेकिन लक्ष्य एक है; इसलिए परस्पर सम्मान ही भारतीयता की पहचान है। डॉ. भागवत ने ‘पांच परिवर्तन’—सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, परिवार जीवन मूल्य, स्वबोध और नागरिक कर्तव्य—को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आधार बताया। पर्यावरण पर बोलते हुए उन्होंने श्री गुरु नानक देव जी की पंक्ति “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” का उल्लेख कर प्रकृति संरक्षण को सांस्कृतिक दायित्व बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “संघ कार्य” का अर्थ किसी संगठन विशेष का विस्तार नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की सेवा है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संवाद सामाजिक संदेश के साथ-साथ व्यापक वैचारिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है।