Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
चंडीगढ़ 05 March : पंजाब में 19 वर्षीय छात्र की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत के मामले के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पिछले दो वर्षों के दौरान उन सभी मामलों का विस्तृत ब्योरा मांगा है, जिनमें पुलिस हिरासत से भागने के दौरान आरोपी मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए। यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में मांग की गई है कि ऐसे मामलों में संवैधानिक सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। याचिकाकर्ता निखिल सराफ ने अदालत से आग्रह किया है कि राज्य सरकार पिछले दो वर्षों में पुलिस हिरासत में रहते हुए या हिरासत से भागने के तुरंत बाद मारे गए अथवा घायल हुए आरोपियों की कुल संख्या और उससे जुड़े मामलों का पूरा विवरण पेश करे। याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा “पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम महाराष्ट्र राज्य” मामले में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, उनके पालन की स्थिति भी स्पष्ट की जाए। इन दिशा-निर्देशों के तहत मुठभेड़ के मामलों में स्वतंत्र जांच, पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य माना गया है। इसके अलावा याचिका में मांग की गई है कि जिन पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी में आरोपी हिरासत से भागने के मामले सामने आए हैं, उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का विवरण भी अदालत को दिया जाए। साथ ही अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि यदि किसी अधिकारी ने कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ के आदेश दिए हैं या ऐसे अवैध आदेशों को लागू किया है तो उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।