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पंजाब/ यूटर्न/10 मार्च।पंजाब में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद का सीजन शुरू होने वाला है। इससे पहले ही मंडियों में हड़ताल का खतरा मंडरा रहा है। आढ़तियों ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे 1 अप्रैल से हड़ताल पर जा सकते हैं और गेहूं की खरीद का बायकॉट कर सकते हैं। इस संबंध में एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में आढ़तियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें बड़ी संख्या में आढ़ती शामिल हुए। बैठक के दौरान दो मुख्य मुद्दों पर चर्चा की गई। पहला मुद्दा आढ़तियों की ढाई प्रतिशत आढ़त (कमीशन) से संबंधित है। आढ़तियों का कहना है कि ढाई प्रतिशत आढ़त उनका अधिकार है और इसमें कटौती करके उनके हकों को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ढाई प्रतिशत आढ़त को फिर से बहाल किया जाए। आढ़तियों ने यह भी याद दिलाया कि पंजाब सरकार ने वादा किया था कि यदि केंद्र सरकार ढाई प्रतिशत आढ़त लागू नहीं करती तो पंजाब सरकार अपने स्तर पर इसे बढ़ाएगी। हरियाणा सरकार दे रही 55 रुपए प्रति क्विंटल उन्होंने हरियाणा सरकार का उदाहरण दिया, जिसने 9 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर आढ़त को 55 रुपए कर दिया है। इसलिए, आढ़तियों ने पंजाब सरकार से भी इसे हरियाणा के बराबर करने की मांग की है। दूसरा बड़ा मुद्दा ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कानून से जुड़ा है। आढ़तियों का आरोप है कि केंद्र सरकार यह कानून जबरदस्ती उन पर लागू करने की कोशिश कर रही है। खन्ना मंडी के लगभग 100 आढ़तियों को ईपीएफ विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जिसका आढ़तियों ने कड़ा विरोध किया है। हड़ताल पर जाने की दी चेतावनी आढ़ती एसोसिएशन खन्ना के अध्यक्ष हरबंस सिंह रोशा ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने आढ़तियों की मांगों को गंभीरता से नहीं सुना तो उन्हें बड़े स्तर पर संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 1 अप्रैल से गेहूं खरीद का सीजन शुरू होने से पहले समाधान नहीं निकला तो आढ़ती हड़ताल पर जा सकते हैं, जिसका सीधा असर गेहूं की खरीद पर पड़ेगा। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए 16 मार्च को हरिके पत्तन में राज्य स्तरीय सम्मेलन बुलाया गया है। इसमें पंजाब भर के आढ़ती शामिल होंगे और आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। आढ़तियों ने स्पष्ट किया है कि यदि ढाई प्रतिशत आढ़त बहाल नहीं की गई और ईपीएफ के मुद्दे पर राहत नहीं दी गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।