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चंडीगढ़/यूटर्न/15 मार्च।कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि माइक्रो , स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) भारत की जीडीपी वृद्धि में लगभग 25 से 30 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यालयों में कार्य के लिए दैनिक स्तर पर अधिक से अधिक आर्टिफिशल इंटेलीजेंस के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एमएसएमई अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा हैं और देश की प्राकृतिक निर्माण मशीन भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार एमएसएमई के आधुनिकीकरण और विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने उद्योगपतियों को उत्पादों की मांग बढ़ाने के लिए केवल मार्केटिंग पर निर्भर रहने के बजाय कीमत और गुणवत्ता पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हैं। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार लगभग 1.6 लाख एमएसएमई इकाइयों के मजबूत आधार के साथ एक समर्पित एजेंसी स्थापित करने की योजना बना रही है, जो एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक गतिशील और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने में सहायक होगी। यह एजेंसी पंजाब में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, वित्त, प्रौद्योगिकी, बाजार और कौशल तक पहुंच को बेहतर बनाने तथा क्लस्टर आधारित विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एकल संस्थागत मंच के रूप में कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब एमएसएमई क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति अपनाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन, सुविधाओं की साझेदारी और सामूहिक कार्यकुशलता का लाभ मिलेगा। राज्य का उद्देश्य क्लस्टर विकास योजनाओं के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाना है, साथ ही मौजूदा ढांचे में मौजूद कमियों को दूर करने और अब तक पूरी न हो सकी आवश्यकताओं के समाधान के लिए राज्य स्तर का क्लस्टर विकास कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्लस्टर सरकारी विभागों, औद्योगिक संगठनों और क्लस्टर सदस्यों द्वारा गठित विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) के बीच सक्रिय सहयोग के माध्यम से विकसित किए जाएंगे। इससे एमएसएमई के बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी अपनाने और बाजार तैयारी को और मजबूत किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जो नवाचार, लागत प्रतिस्पर्धा और टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार एमएसएमई को राज्य में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिए कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने आगे बताया कि पंजाब सरकार ने सेक्टोरल समितियों की 77 प्रतिशत सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और एक आकर्षक औद्योगिक नीति शुरू की है। निवेशकों को समयबद्ध स्वीकृतियां दी जा रही हैं और यह नई औद्योगिक नीति उद्यमियों के लिए काफी सहायक सिद्ध होगी। इस एमएसएमई सत्र के दौरान रुधरा प्रताप (कुलपति, प्लाक्शा यूनिवर्सिटी ), धर्मेश गोस्वामी (पार्टनर, केपीएमजी ), भूपिंदर पाल सिंह आनंद (डायरेक्टर, जल बाथ फिटिंग्स ), मनबीर सिंह (डायरेक्टर, आईईई एलिवेटर्स ) और राजेश मेहरा (एमडी, एक्टिव क्लोथिंग ) ने भी भाग लिया।