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विशेष अदालत में तीखी बहस, एजेंसी बोली—मामला गंभीर और नॉन-बेलेबल अजीत झा | चंडीगढ़ 02 Jan । भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की जमानत याचिका पर शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में तीखी बहस हुई। सीबीआई ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और नॉन-बेलेबल है, जबकि बचाव पक्ष ने जांच की विश्वसनीयता और प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। भुल्लर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसपीएस भुल्लर ने तर्क दिया कि सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट में कथित घटना की तारीख, समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि रिश्वत की रकम को लेकर भी एजेंसी के रिकॉर्ड में विरोधाभास है—कहीं एक लाख तो कहीं चार लाख रुपये का जिक्र किया गया है, जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ती है। बचाव पक्ष ने चालान में प्रयुक्त शब्द “सेवा पानी” को रिश्वत से जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसके कई अर्थ हो सकते हैं और इसे सीधे तौर पर रिश्वत मानना गलत है। साथ ही, सेक्टर-9डी चंडीगढ़ में शिकायतकर्ता, कथित बिचौलिए और सीबीआई अधिकारी की लोकेशन मात्र मौजूदगी दर्शाती है, इससे अपराध सिद्ध नहीं होता। वहीं सीबीआई की ओर से पेश वकील नरेंद्र सिंह ने कहा कि आरोपी एक वरिष्ठ पद पर रहा अधिकारी है, ऐसे में साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका बनी रहती है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि इंस्पेक्टर पवन लांबा और इंस्पेक्टर आर.एम. शर्मा मामले के अहम गवाह हैं तथा कथित बिचौलिए को भेजे गए संदेश—“पूरे आठ लाख करने हैं”—रिश्वत की मांग की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं। सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत सीबीआई डीएसपी को गिरफ्तारी का पूर्ण अधिकार है और क्षेत्राधिकार इस मामले में बाधा नहीं बनता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।