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चुनावी रण से पहले सियासत में आएगा भूचाल, बदलेंगी चालें और चेहरे लुधियाना | 2 जनवरी दिनेश मौदगिल पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी एक साल दूर हैं, लेकिन साल 2026 ही वह निर्णायक मंच होगा, जहां अगली सत्ता की पटकथा लिखी जाएगी। यह साल केवल तैयारी का नहीं, बल्कि राजनीतिक उठापटक, बड़े फैसलों और चेहरे बदलने का साल साबित होने जा रहा है। आने वाले महीनों में पंजाब की सियासत में ऐसा हलचल भरा माहौल बनेगा, जहां हर दल अपनी बिसात सहेजेगा और हर नेता अपनी चाल चलेगा। बदलती सियासी तस्वीर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल (बादल), बीजेपी और नई उभरती अकाली ताकतें—सभी 2026 में अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देंगी। दल-बदल, नई जॉइनिंग और नेतृत्व परिवर्तन इस साल की सबसे बड़ी पहचान होंगे। यह वह दौर होगा, जब कई बड़े नेता अपनी राजनीतिक दिशा बदलते नजर आएंगे। कुंवर विजय प्रताप और सिद्धू पर रहेगी सबकी नजर पूर्व आईपीएस और अमृतसर से विधायक डॉ. कुंवर विजय प्रताप सिंह आज पंजाब की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में हैं। उनकी अगली राजनीतिक चाल—किस पार्टी के साथ और किस भूमिका में—2026 की राजनीति का बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकती है। उधर, नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीति में वापसी को लेकर भी अटकलें तेज हैं। क्या वह फिर कांग्रेस के साथ पिच पर उतरेंगे या किसी नई सियासी टीम का हिस्सा बनेंगे—यह सवाल जनता और दलों, दोनों को बेचैन किए हुए है। आप: सत्ता बचाने की अग्निपरीक्षा सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए 2026 सबसे चुनौतीपूर्ण होगा। 2022 की आंधी के बाद अब जनता का मूड, सरकार का प्रदर्शन और वादों की हकीकत—सब कुछ कठोर कसौटी पर होगा। आप किस नए एजेंडे और किन नए चेहरों के साथ मैदान में उतरेगी, यही तय करेगा कि वह सत्ता में वापसी कर पाएगी या नहीं। कांग्रेस: एकजुटता या अस्तित्व का सवाल कभी राज्य की सबसे ताकतवर रही कांग्रेस आज गुटबाजी के बोझ से जूझ रही है। 2026 में नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक सर्जरी की चर्चा तेज है। अगर हाईकमान कांग्रेस को एकजुट कर देता है, तो 2027 का चुनाव त्रिकोणीय नहीं, सीधी टक्कर में बदल सकता है। बीजेपी: शतरंज की चाल, लंबा खेल बीजेपी इस बार पंजाब में केवल मौजूदगी नहीं, प्रभावशाली भूमिका चाहती है। बड़े नेताओं की संभावित एंट्री, संगठन में बदलाव और किसानों की नाराजगी दूर करने की कोशिशें—2026 में बीजेपी की रणनीति का हिस्सा होंगी। पार्टी इस साल अपनी “गोटियां” सावधानी से जमाएगी। अकाली दल: सुखबीर का मिशन पुनरुत्थान लगभग एक दशक से सत्ता से बाहर अकाली दल के लिए 2026 पुनरुत्थान का साल होगा। सुखबीर सिंह बादल रूठों को मनाने, नए चेहरों को जोड़ने और संगठन को फिर से खड़ा करने में पूरी ताकत झोंकेंगे। सड़कों से सदन तक सियासी गर्मी धरने, प्रदर्शन, रैलियां, सियासी सम्मेलन और आरोप-प्रत्यारोप—2026 में पंजाब की राजनीति सड़कों पर भी दिखेगी और सदन के बाहर भी। और हां, यह साल दल-बदलुओं का सीजन भी होगा—कुछ नेता तो एक से ज्यादा बार अपनी राजनीतिक जर्सी बदलते नजर आ सकते हैं। 2026 सिर्फ एक साल नहीं, बल्कि 2027 की सत्ता का सेमीफाइनल है। जो दल और नेता इस साल सही चाल चलेंगे, वही अगले साल पंजाब की कुर्सी के दावेदार बनेंगे। पंजाब की राजनीति में अब खेल तेज़ हो चुका है—और दर्शकों की नजरें हर मूव पर टिकी हैं।