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अशोक सहगल लुधियाना, 23 मार्च / यूटर्न : स्वास्थ्य विभाग के फूड विंग की कार्यशैली को देखते हुए साफ तौर पर कहा जाता है कि लोगों की सेहत को खतरा बरकरार है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग अपने निर्धारित सैंपलिंग के कोटे को पूरा नहीं करता रही बीते वर्षों में सरकार ने जिले के सैंपलिंग के कोटे को काम कर दिया है जबकि पहले 250 सैंपल हर महीने लेने के निर्देश जारी किए गए थे त्योहारों के दिनों में क्योंकि फूड बिजनेस ऑपरेटर में प्रतिस्पर्धा होती है ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को जो इनपुट मिलते हैं उनमें से चंद मिलावटखोरों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है जब शेष वर्ष गिने चुने सैंपलों को ही जांच के लिए भेजा जाता है सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी की उड़ी धज्जियां पिछले दिनों जिले में केक के विभिन्न सैंपल लेकर जांच में भेजे गए इनमें से कई सैंपल फेल हो गए परंतु उसके बाद रूटीन में केक सैंपल लिए जाने बंद कर दिए गए इसी तरह हलवाइयों आदि में इस्तेमाल किए गए तेल के सैंपल लेकर जांच में के लिए भेजे गए और वह सैंपल जांच में फेल हो गए यानी कि वह इस्तेमाल किया हुआ तेल खाने लायक नहीं पाया गया उसके बाद जांच बंद कर दी गई हर बार उच्च अधिकारी यह कहते नहीं थकते की घटिया खाद्य पदार्थ बनाने वालों तथा मिलावटखोरों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी परंतु स्वास्थ्य विभाग के फूड विंग ने फूड सैंपल लेना ही बंद कर दिया अथवा बहुत कम कर दिया त्योहारों के दिनों में फूड बिजनेस ऑपरेटरो को मिलती है विशेष छूट त्यौहारों के दिनों में भी स्वास्थ्य विभाग के फूड विंग की अनदेखा करो मौज करो की पॉलिसी से सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरी टॉलरेंस पॉलिसी के दावे पानी मांगते नजर आए दीपावली के दिनों में नाम मात्र की संपलिंग की गई दूसरी और फूड बिजनेस ऑपरेटर यानी कि खाने पीने की वस्तुओं का निर्माण अथवा कारोबार करने वालों के यहां एजेंटो का बोलबाला रहा विभाग की तालमेल बनाकर चलने वाली पॉलिसी सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर भारी पड़ा। आरोपी अधिकारियों पर जांच हुई बंद जिले में रह चुके स्वास्थ्य अधिकारी जिन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे जिसमे लगभग 10 क्विंटल नकली देसी घी के स्टाक को गायब कराने का मामला भी शामिल है के विरुद्ध चल रही जांच जिसमें फूड सेफ्टी अफसर भी शामिल थे एकाएक बंद कर दिया गया अब आलम तो यह बताया जाता है कि वहीं आरोपी अधिकारी दोबारा से लुधियाना का चार्ज लेने के लिए नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। इसके अलावा सैकड़ो फूड सैंपलों की गायब रिपोर्टो का आज तक पता नहीं चल सका होना ही संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है सैंपलिंग के काम में तेजी लाने की मांग लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को फूड सैंपल की जांच के काम में तेजी लानी चाहिए और हर महीने से 300 फुट सैंपल जांच के लिए भेजे जाने चाहिए इसके लिए बढे छोटे दुकानदार को अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि हर वर्ग के फूड बिजनेस ऑपरेटर से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाने चाहिए ताकि लोगों को पता चले की वह खाने पीने की शुद्ध वस्तुएं खा रहे हैं अथवा नहीं क्योंकि सैंपल न लेने के कारण बाजार में मिलावट खोरी और घटिया खाद्य पदार्थ की भरमार हो जाती है जिससे लोगों की सेहत को खतरा बरकरार बना रहता है