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चंडीगढ़/यूटर्न/26 मार्च। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा कलेक्टर रेट में की गई बढ़ोतरी का विरोध शुरू हो गया है। उद्योग व्यापार मण्डल चंडीगढ़ ने इस फैसले को व्यापारिक वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला करार दिया है। मंडल के अध्यक्ष कैलाश चंद जैन ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि मौजूदा आर्थिक हालात में कलेक्टर रेट बढ़ाना न तो व्यावहारिक है और न ही जरूरी। उन्होंने कहा कि इस फैसले का असर केवल प्रॉपर्टी की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कन्वर्जन चार्ज और अन-अर्न्ड प्रॉफिट जैसे अन्य शुल्कों में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे व्यापारियों पर कुल वित्तीय बोझ कई गुना बढ़ जाएगा। जैन ने कहा जहां एक ओर सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं इस तरह के निर्णय व्यापार को और कठिन बना देते हैं।उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष हुई बढ़ोतरी का भी व्यापारियों ने विरोध किया था और अब तक उसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे फैसले लेने से पहले व्यापारियों को राहत देने वाले कदम उठाए जाएं। साथ ही बिल्डिंग बायलॉज में सुधार, फार में वृद्धि, ओटीएस (वन टाइम सेटलमेंट) योजना लागू करने और बिल्डिंग वायलेशन मामलों में राहत देने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेने की आवश्यकता बताई। मंडल के सचिव नरेश कुमार गोयल ने कहा कि वर्तमान समय में व्यापारियों को राहत देने की जरूरत है, न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की। उद्योग व्यापार मंडल ने प्रशासक से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कलेक्टर रेट बढ़ोतरी के फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लेने और व्यापारियों की लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।