Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
चंडीगढ़/यूटर्न/28 मार्च। चंडीगढ़ के दरिया गांव चंडीगढ़ में अवैध निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रेलवे स्टेशन के सामने रेड लाइन के बाहर एक विशाल बहुमंजिला इमारत का निर्माण खुलेआम जारी है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक रोक के बावजूद निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो चुका है, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कथित ‘सेटिंग’ पर सवाल उठने लगे हैं। हजार वर्ग गज में खड़ी हो रही ‘अवैध’ इमारत सूत्रों के मुताबिक करीब एक हजार वर्ग गज से अधिक क्षेत्र में बन रही यह इमारत दड़वा क्षेत्र की सबसे बड़ी अवैध बिल्डिंग बताई जा रही है। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि अब ऊपरी मंजिलों पर तेजी से काम चल रहा है। रोक के आदेश भी बेअसर करीब एक माह पहले जिला प्रशासन ने इस निर्माण पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शनिवार को साइट पर फिर से निर्माण गतिविधियां शुरू हो गईं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि या तो आदेशों की अनदेखी हो रही है या फिर कार्रवाई को लेकर गंभीरता का अभाव है। ‘नोटिस राज’ या मिलीभगत? स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित रह गई है। जहां शहर के अन्य इलाकों में मामूली उल्लंघनों पर भी सख्त कार्रवाई होती है, वहीं दड़वा में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। तहसीलदार, पटवारी, एसडीएम और असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर जैसे अधिकारियों पर अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी है, लेकिन मौके पर उनकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों की खुलेआम धज्जियां नियमों के अनुसार रेड लाइन के बाहर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद न केवल यह बहुमंजिला इमारत खड़ी की जा रही है, बल्कि इलाके में अवैध होटल और गेस्ट हाउस भी चल रहे हैं। दड़वा में कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काटे जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं, जो शहरी नियोजन और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। जवाब-तलब, लेकिन कार्रवाई कब? मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। हालांकि, बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहेगी या जमीन पर भी कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन की साख दांव पर दड़वा में जारी यह अवैध निर्माण अब सिर्फ एक बिल्डिंग का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन की साख, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।