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जगरांव/यूटर्न/1/अप्रैल। ​आज ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 'काला दिवस' मनाया गया। इसी कड़ी में पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन के सदस्यों ने जगरांव डिपो के गेट पर इकट्ठा होकर भारी रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लेबर कोड को लागू करने के फैसले को तानाशाही करार दिया। ​मजदूरों का मानसिक और शारीरिक शोषण है लेबर कोड: जलौर सिंह ​यूनियन के पंजाब ज्वाइंट सेक्रेटरी जलौर सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि सरकार इन चार लेबर कोड को लागू करती है, तो यह सीधे तौर पर श्रमिकों का मानसिक और शारीरिक शोषण होगा। उन्होंने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के साथ मिलकर सरकारी संस्थानों को खत्म करने की साजिश रच रही है। ​प्रदर्शन के मुख्य बिंदु: ​ठेका प्रथा का विरोध: वक्ताओं ने कहा कि सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्रथा के जरिए कम वेतन देकर वर्करों का शोषण किया जा रहा है। ​निजीकरण पर हमला: ट्रांसपोर्ट विभाग में 'किलोमीटर स्कीम' के तहत प्राइवेट बसों को शामिल करना विभाग के निजीकरण की ओर एक कदम है, जिससे रोजगार खत्म हो रहे हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। ​पुरानी यादें और चेतावनी: नेताओं ने याद दिलाया कि बीती 12 फरवरी को भी देशव्यापी हड़ताल कर इन कोडों का विरोध किया गया था, लेकिन सरकार लगातार कर्मचारी विरोधी फरमान जारी कर रही है। ​पक्की भर्ती पर रोक: सरकार भविष्य में नियमित भर्तियों पर रोक लगाकर सरकारी ढांचे को कमजोर कर रही है। ​"अगर सरकार ने इन कर्मचारी विरोधी फरमानों को वापस नहीं लिया या इन्हें जबरन लागू करने की कोशिश की, तो आने वाले समय में ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर और भी तीखा संघर्ष किया जाएगा।" यूनियन नेतृत्व ​प्रदर्शन में शामिल मुख्य चेहरा: ​इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जलौर सिंह (ज्वाइंट सेक्रेटरी, पंजाब), हरमिंदर सिंह सिद्धू (जनरल सेक्रेटरी, जगरांव डिपो), सोहन सिंह (डिपो प्रधान), चेयरमैन जसपाल सिंह, कैशियर मोहम्मद रफी, प्रेस सचिव बूटा सिंह, दविंदर सिंह, भीम जज सिंह, वर्कशॉप प्रधान राज खान सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और नेता उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है।