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हरियाणा/यूटर्न/4 अप्रैल। जग ज्योति दरबार में दो दिन से चल रहे भव्य चैत्र पूर्णिमा सालाना मेले का समापन हो गया। उल्लेखनीय है कि पिछले कई वर्षों से समाज सेवा एवं जनकल्याण की भावना से देश के महान साधु संतों के सान्निध्य में जग ज्योति दरबार में चैत्र पूर्णिमा का सालाना मेला आयोजित किया जाता है। विशाल मेले के समापन पर भी संत महापुरुषों एवं महंत राजेंद्र पुरी ने विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना की एवं समाज कल्याण को समर्पित चादर की रस्म अदा की। इस मौके पर दरबार में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मेले के समापन अवसर पर संतों के साथ सत्संग करते हुए महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि क्षमा आत्मा की शुद्धि और प्रेम का सर्वोच्च रूप है। क्षमा केवल शब्द नहीं है, यह एक अनुभव है जो आत्मा की गहराई से निकलता है। उन्होंने कहा कि क्षमा का अभ्यास करना कठिन हो सकता है लेकिन यही हमारी आध्यात्मिक परिपक्वता की पहचान है। श्री भगवद गीता में भी कहा गया है कि क्षमा धर्म का आभूषण है। क्षमा किसी एक धर्म या संस्कृति की नहीं, बल्कि मानवता की आत्मा है। इस से पूर्व पूरी रात भजन-कीर्तन, कव्वालियों और नाच गाकर परमात्मा का गुणगान किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री हरियाणा के मीडिया कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी, बलराम सिंह, मलकीत सिंह, जसपाल सिंह, राहुल, सुशील सैनी, अमरजीत, रंजीत राठी, विजय राठी, भगत अजय राठी, विशाल, रामपाल, राजीव शर्मा, जय भगवान, हरदीप सिंह, मनप्रीत सहित अनेक सेवक भी मौजूद रहे।