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चंडीगढ़/यूटर्न/10 अप्रैल। चंडीगढ़ में सुप्रीम कोर्ट ने रेहड़ी-पटरी वालों के लिए अहम फैसला लेते हुए कहा है कि उन्हें अचानक या जबरदस्ती नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ये लोग भी अपने परिवार का पालन करते हैं, इसलिए उनके काम का सम्मान होना चाहिए। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस कोटिस्वर सिंह ने कहा कि सविंधान के अनुसार सड़क पर सामान बेचना भी काम करने के अधिकार का हिस्सा है। हालांकि, बिना नियम के कहीं भी दुकान लगाने से लोगों को चलने में दिक्कत और ट्रैफिक की समस्या हो सकती है, इसलिए सरकार को संतुलन बनाना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ हटाना सही समाधान नहीं है, बल्कि उनको दूसरी जगह काम करने का मौका देना जरूरी है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वह वेंडिंग जोन बनाकर सही व्यवस्था करे और लोगों को जानकारी दे। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी।