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डेराबस्सी-अंबाला रोड पर स्थित इंडस अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। 4 अप्रैल को सीने में हल्के दर्द की शिकायत के बाद भर्ती कराए गए 35 वर्षीय दीपक की 13 अप्रैल को मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतक की पहचान दीपक के रूप में हुई है, जो डेराबस्सी की जीबीपी सोसाइटी का निवासी था और स्पेयर पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर काम करता था। परिजनों के अनुसार, दीपक 4 अप्रैल को हल्का दर्द होने पर खुद गाड़ी चलाकर इंडस अस्पताल पहुंचा था, जहां डॉक्टरों ने उसके दिल में स्टेंट डाला। परिवार का आरोप है कि स्टेंट डालने के बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। बाद में डॉक्टरों ने दिमाग में ब्लॉकेज होने की बात कहकर उसका ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के बाद दीपक को होश नहीं आया और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। बॉक्स 13 अप्रैल शाम करीब 5 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिवार—पत्नी, भाई और पिता—ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही दीपक की मौत हुई। उनका कहना है कि बिना पूरी जानकारी के दिमाग का ऑपरेशन किया गया और मरीज को कृत्रिम रूप से वेंटिलेटर पर रखकर परिवार से लाखों रुपये वसूले गए। परिजनों ने डॉक्टर राजेश कुमार और डॉक्टर नरेश बंसल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2023 में भी इसी अस्पताल पर किडनी रिप्लेसमेंट के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी के गंभीर आरोप लग चुके हैं। बॉक्स क्या कहना है डेराबस्सी के एसएचओ का इस संबंध में डेराबस्सी के एसएचओ इंस्पेक्टर सुमित मोर ने बताया कि परिवार की शिकायत मिल गई है। शव को कब्जे में लेकर अस्पताल में रखवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन मोहाली द्वारा विशेषज्ञों का पैनल बनाया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बॉक्स क्या कहना है इंडस अस्पताल के डॉक्टर का “दीपक हमारे पास गंभीर स्थिति में आए थे, जिसके चलते रिपोर्ट के आधार पर उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान दिमाग में क्लॉट का पता चला। हमने पहले ही परिजनों को जोखिम की जानकारी दे दी थी और उनके सभी कंसेंट हमारे पास मौजूद हैं। हमें उनकी मृत्यु का गहरा दुख है, और उन्हें बचाने के लिए हमने हर संभव प्रयास किया।” डॉ. विनीश नरूला, इंडस अस्पताल, डेराबस्सी