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शहर में वाहन पार्किंग की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है और करीब साढ़े छह लाख आबादी के लिए रोजाना परेशानी का कारण बन गई है। वर्षों से चली आ रही पार्किंग की कमी अब ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। इस बीच प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। शहर में मौजूद 25 से 30 बैंक्वेट हॉल, करीब 500 होटल और हजारों शोरूम्स में से बड़ी संख्या के पास पर्याप्त पार्किंग सुविधा नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, बैंक्वेट हॉल में से केवल लगभग 50 प्रतिशत के पास ही पार्किंग है, जबकि उनमें भी क्षमता सीमित है। इसी तरह करीब 500 होटलों में से आधे में ही पार्किंग उपलब्ध है। वहीं, एक हजार से अधिक शोरूम्स में से मात्र 30 प्रतिशत के पास ही वाहनों के लिए उचित व्यवस्था है। पार्किंग की कमी के चलते लोग मजबूरी में अपने वाहन सड़कों पर खड़े कर रहे हैं, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है और समय की भारी बर्बादी हो रही है। स्थानीय निवासियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने नगर परिषद पर नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भवन निर्माण के दौरान पार्किंग मानकों को नजरअंदाज कर नक्शे पास किए गए, जिसके चलते आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है। कुलभूषण शर्मा ने कहा, “सड़कें चलने के लिए होती हैं, पार्किंग के लिए नहीं। जिन संस्थानों के पास पार्किंग नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।” पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष उदयवीर सिंह ढिल्लो ने आरोप लगाया, “अगर बाईलॉज के अनुसार नक्शे पास होते, तो आज यह समस्या पैदा नहीं होती। अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं।” निवासी सत्यवान ढांडा का कहना है, “बैंक्वेट हॉल लाखों रुपये वसूलते हैं, लेकिन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं होती, जिससे लोगों को सड़क पर वाहन खड़े करने पड़ते हैं।” अन्य निवासियों ने भी नगर परिषद पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए और कहा कि इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहरवासियों ने मांग की है कि जिन होटल, बैंक्वेट हॉल और शोरूम्स के पास पर्याप्त पार्किंग नहीं है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में नक्शे पास करते समय पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। “जिन होटलों और मैरिज पैलेसों के पास पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।” — परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जीरकपुर