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हल्का डेराबस्सी के अंतर्गत बहने वाली चोआ नदी में लगातार केमिकल छोड़े जाने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्थित फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित पानी सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे नदी का पानी दिन-प्रतिदिन काला होता जा रहा है और उसमें झाग की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। उनका कहना है कि पहले चोआ नदी का पानी साफ हुआ करता था और किसान इसी पानी से अपनी फसलों की सिंचाई करते थे। सब्जियों और अनाज की खेती इसी पानी पर निर्भर थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि इस पानी का इस्तेमाल करना भी जोखिम भरा हो गया है। किसानों ने बताया कि दूषित पानी के कारण उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और उत्पादन में भी गिरावट आई है। साथ ही जमीन की उर्वरता पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नदी के आसपास सैकड़ों की संख्या में छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। इनमें से कुछ बड़ी कंपनियों पर विशेष तौर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे भूमिगत पाइपलाइन के जरिए सीधे नदी में केमिकल छोड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि बहते पानी में भी झाग और कालेपन की स्थिति साफ तौर पर देखी जा सकती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदूषण का स्तर काफी अधिक है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी समय-समय पर मौके पर पहुंचकर पानी के सैंपल तो लेते हैं, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। लोगों का आरोप है कि कई बार सैंपल की रिपोर्ट भी फेल आ चुकी है, इसके बावजूद जिम्मेदार इकाइयों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में रोष का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि चोआ नदी में हो रहे प्रदूषण की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषी फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि आखिर कब तक डेराबस्सी के लोग इस तरह की “नरक भरी जिंदगी” जीने को मजबूर रहेंगे।