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एक ओर जहां नगर परिषद शहर में विकास कार्यों और करोड़ों रुपये के बजट के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर उसकी अपनी ही बिल्डिंग बदहाली का शिकार बनी हुई है। जीरकपुर नगर परिषद भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यह अब कर्मचारियों और रोजाना आने वाले हजारों लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। भवन के अंदर कई जगहों पर बिजली की तारें खुली पड़ी हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। वहीं परिसर में लगे वाटर कूलर या तो खराब हैं या अपनी जगह से हटे हुए हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। इमारत की दीवारों से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है और जगह-जगह “पपड़ियां” उतर चुकी हैं। इससे न केवल भवन की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि उसकी मजबूती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति भवन के पिछले हिस्से की है, जहां दीवारों पर पीपल और तुलसी जैसे पौधे उग आए हैं, जो दीवारों को धीरे-धीरे कमजोर कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नगर परिषद हर साल भवन के रखरखाव के लिए एस्टीमेट तो तैयार करती है, लेकिन पिछले करीब 10 वर्षों से जमीनी स्तर पर कोई ठोस मरम्मत कार्य नहीं हुआ। कागजों में दावे जरूर किए गए, लेकिन हकीकत में भवन लगातार खस्ताहाल होता गया। इमारत के पिछले हिस्से में बने सुविधा केंद्र की स्थिति भी खराब है। यहां लगा वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे लोगों को पीने के पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही। गौरतलब है कि इसी भवन में तहसील कार्यालय और एसपी कार्यालय भी स्थित हैं, जहां रोजाना हजारों लोग अपने जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की जर्जर व्यवस्था प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब नगर परिषद अपनी ही बिल्डिंग का रखरखाव नहीं कर पा रही, तो शहर के विकास और सुविधाओं के दावे कितने सच्चे हैं? बॉक्स नगर परिषद की टॉप फ्लोर पर बेसमेंट में पड़े रिकॉर्ड को दो कमरों में शिफ्ट कर रिकॉर्ड रूम बनाया जाएगा, जहां दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से रखा जाएगा। “2024-25 में 10 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था, जिसके तहत बिल्डिंग की अंदरूनी कमियों को दूर करना प्रस्तावित था। अब 2026-27 के लिए 70 लाख रुपये का नया एस्टीमेट तैयार किया गया है, जिसमें बाहरी हिस्से में व्हाइट वॉश, अंदर टाइल्स और अन्य जरूरी मरम्मत कार्य कराए जाएंगे।”