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महान सिख योद्धा जस्सा सिंह अहलूवालिया की जयंती पर श्रद्धांजलि
कुरूक्षेत्र (अश्विनी वालिया): अहलूवालिया सभा द्वारा आज 3 मई को अहलूवालिया चौक पर महान सिख योद्धा और कपूरथला रियासत के संस्थापक जस्सा सिंह अहलूवालिया की जयंती अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर सभा के सदस्यों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके जीवन की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। अहलूवालिया सभा के संरक्षक राजिंदर मोहन वालिया ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जस्सा सिंह का जन्म 3 मई 1718 को लाहौर के पास अहलू गाँव में हुआ था। पिता बदर सिंह के निधन के बाद उनका पालन-पोषण गुरु गोविंद सिंह जी की धर्मपत्नी माता सुंदरी जी की देखरेख में दिल्ली में हुआ। वहां उन्होंने शस्त्र विद्या के साथ-साथ अरबी, फारसी और धर्मग्रंथों का ज्ञान प्राप्त किया। 1748 में बैसाखी के दिन उन्हें *'दल खालसा'* का सर्वोच्च सैन्य कमांडर नियुक्त किया गया। सभा के प्रधान नरेंद्र वालिया ने कहा कि जस्सा सिंह जी की वीरता के कारण ही सिख समुदाय ने उन्हें सुल्तान-उल-कौम की उपाधि दी। उन्होंने 1761 में अहमद शाह अब्दाली को हराकर लाहौर पर विजय प्राप्त की और सिखों के सिक्के जारी किए। यही नहीं, 1762 के 'वड्डा घल्लूघारा' (नरसंहार) के दौरान उन्होंने अद्भुत साहस दिखाते हुए सिख कौम का नेतृत्व किया और 1772 में कपूरथला राज्य की स्थापना की। उप प्रधान अशोक रोशा ने उनके मानवीय पक्ष को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अहमद शाह अब्दाली के चंगुल से 2200 कन्याओं को मुक्त कराकर उनके घर पहुँचाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि श्री हरिमंदिर साहिब के पुनर्निर्माण में जस्सा सिंह जी का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज को संदेश दिया कि युवाओं को सेवा क्षेत्र, अस्पतालों और धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए,  वैवाहिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए समाज के प्रबुद्ध लोगों को आगे आना चाहिए, सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि समाज के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।