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पारदर्शी ऑनलाइन ऑक्शन्ज़ को अपनाकर हम राज्य का राजस्व बचाने और वास्तविक ऑपरेटरों को समान अवसर प्रदान करने के साथ साथ अवैध खनन पर अंकुश लगा रहे हैं: बरिंदर कुमार गोयल *चंडीगढ़, 11 जनवरी : पारदर्शिता और जिम्मेदार तरीके से संसाधनों के प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूत करते हुए पंजाब सरकार ने राज्य भर में माइनिंग साइटों के लिए नई नीलामी प्रक्रिया शुरू की है और संशोधित पंजाब माइनर मिनरल नियमों के तहत नीलामी ढांचे में बड़े सुधार किए हैं। इन सुधारों पर प्रकाश डालते हुए खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, “हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जाए और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जनहित में किया जाए। पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी प्रणाली को अपनाकर हम न केवल राज्य के राजस्व की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि योग्य ऑपरेटरों को समान अवसर प्रदान कर रहे हैं और अवैध खनन पर भी सख्ती से अंकुश लगा रहे हैं।” कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पहले चरण में सरकार ने एक खुली और प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से 29 नई वाणिज्यिक माइनिंग साइटों (सीएमएस) की नीलामी की। अक्टूबर–नवंबर में शुरू की गई इन नीलामियों में 16 सफल बोलियां प्राप्त हुईं और 11.61 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया गया। उल्लेखनीय है कि यह पिछले तीन वर्षों में राज्य द्वारा आयोजित की गई पहली मूल्य-आधारित माइनिंग नीलामियां हैं। कैबिनेट द्वारा स्वीकृत सुधारों के चलते पुरानी मात्रा-आधारित नीलामी प्रणाली को समाप्त किया गया है, जिसमें बोलीदाता किसी साइट के अधिकतम हिस्से को चालू करने का प्रस्ताव देकर बोली लगाते थे। इस प्रक्रिया में कई बोलीदाता समान मात्रा, जो कि अक्सर 100 प्रतिशत होता था, का हवाला देते थे, जिसके परिणामस्वरूप ड्रॉ के माध्यम से चयन किया जाता था। समय के साथ इस व्यवस्था के कारण राजस्व में कमी, गैर-गंभीर बोलीदाताओं की संख्या में वृद्धि, सीमित निवेश प्रतिबद्धता और खदानों के संचालन में देरी जैसी समस्याएं सामने आईं, क्योंकि पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करना सरकार की जिम्मेदारी होती थी। इन प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए कैबिनेट ने देशभर में अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप संरचनात्मक सुधारों की एक श्रृंखला को मंजूरी दी। अब नीलामियां प्रतिस्पर्धी मूल्य बोली (प्राइस बिडिंग) पर आधारित होंगी, जिससे निष्पक्ष आवंटन और बेहतर राजस्व सुनिश्चित होगा। बोलीदाताओं को गंभीरता दर्शाने के लिए अग्रिम भुगतान करना होगा और स्थिर राजस्व प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए रॉयल्टी भुगतान भी पहले से एकत्र किए जाएंगे। पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने की जिम्मेदारी अब बोलीदाताओं को सौंपी गई है, जिससे खदानों के संचालन में होने वाली देरी में काफी कमी आएगी। खदान के संचालन न होने की स्थिति में भी न्यूनतम भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सट्टे वाली बोली को रोकने हेतु स्पष्ट “डेड रेंट” प्रावधान भी शुरू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, लीज की अवधि तीन वर्षों से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है, जिससे ऑपरेटरों को अधिक स्थिरता और बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले चरण में 29 स्थानों की नीलामी की गई है, इसी तरह विभिन्न चरणों में लगभग 100 और स्थानों की नीलामी की जाएगी। इन सुधारों से कच्चे माल की कानूनी आपूर्ति में वृद्धि, संचालन समय-सीमा में तेज़ी, नियामक प्रणाली में पारदर्शिता और सरकारी राजस्व में काफ़ी वृद्धि की उम्मीद होने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि नीतिगत संशोधनों, सीआरएमएस/एलएमएस की शुरुआत और नीलामी सम्बन्धी सुधारों के माध्यम से पंजाब के माइनिंग सेक्टर में व्यापक सुधार होंगे। इनका उद्देश्य जटिल प्रणाली को सरल बनाना, पारदर्शिता लाना, एकाधिकार को समाप्त करना, अवैध खनन पर रोक लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जनहित में किया जाए। पंजाब सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पारदर्शी ऑनलाइन नीलामी की शुरुआत, सीआरएमएस और एलएमएस के माध्यम से माइनिंग को कानूनी मान्यता देना, राज्य के राजस्व की रक्षा करने, योग्य ऑपरेटरों को समान अवसर प्रदान करने और माइनिंग प्रशासनिक ढांचे में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।