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डेराबस्सी 14 Jan : आपातकालीन हालात में सेहत सुविधाएं कितनी तत्पर और कारगर हैं, इसकी हकीकत मंगलवार रात डेराबस्सी में सामने आई। सड़क हादसे में घायल एक युवक को सिविल अस्पताल पहुंचाने के लिए राहगीरों को पैदल मशक्कत करनी पड़ी। हैरानी की बात यह रही कि सिविल अस्पताल घटनास्थल से महज 200 मीटर और पुलिस स्टेशन केवल 50 मीटर की दूरी पर था, इसके बावजूद एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। घटना मंगलवार रात करीब 9 बजे की है। पुलिस स्टेशन के समीप कॉलेज रोड पर एक युवक औंधे मुंह सड़क पर पड़ा मिला। वहां से गुजर रहे मोहित और उमेश शर्मा ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि युवक शराब के नशे में बेसुध पड़ा है, लेकिन पास जाकर देखा तो उसके सिर से काफी खून बह रहा था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी और 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल की, लेकिन कॉल ही नहीं लग सकी। दोनों युवक पैदल ही सिविल अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में मौजूद सुरक्षा कर्मी और एक अन्य व्यक्ति ने उन्हें एंबुलेंस चालक को ढूंढने को कहा। अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस के दरवाजे खटखटाए गए और आसपास पूछताछ भी की गई, लेकिन न तो चालक मिला और न ही कोई स्टाफ उपलब्ध हुआ। करीब 20 मिनट तक एंबुलेंस के लिए भटकने के बाद युवकों ने खुद इमरजेंसी से स्ट्रेचर उठाया और घटनास्थल की ओर ले गए। पुलिस की मदद से शव को कंबल में लपेटकर स्ट्रेचर पर रखा गया और पैदल ही वापस अस्पताल लाया जाने लगा। इसी दौरान पुलिस की पीसीआर मौके पर पहुंच गई। इसके बाद स्ट्रेचर की बजाय शव को पीसीआर वाहन में डालकर डेराबस्सी सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी। एएसआई दिलबाग सिंह ने बताया कि मृतक की पहचान 27 वर्षीय रोहित कुमार पुत्र भगवान देवी के रूप में हुई है, जो यूपी-बिहार मूल का रहने वाला था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किसी अज्ञात वाहन ने युवक को टक्कर मारी और वाहन उसकी छाती के ऊपर से गुजर गया, जिससे सिर में गंभीर चोटें आईं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना के बाद राहगीरों ने स्वास्थ्य विभाग की इमरजेंसी सेवाओं पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि युवक जीवित होता तो समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण उसकी जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता।