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अजीत झा. चंडीगढ़ 17 Jan । रायपुरकलां स्थित गोशाला में 50 से अधिक गोवंश की मौत के मामले ने प्रशासन और शहरवासियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शनिवार को गोशाला का निरीक्षण किया और घटना में हुई खामियों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दृष्टि से उन्हें भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए थी। प्रशासक ने बताया कि मशीनरी की खराबी के कारण 11 जनवरी से मृत गायों का संस्कार नहीं हो पा रहा था, जिससे शव गोशाला परिसर में इकट्ठे हो गए। उन्होंने कहा, “चार दिन से अधिक समय तक शवों को बाहर नहीं रखा जाना चाहिए था। यह प्रशासनिक कमी थी, जिसकी जांच चल रही है। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” निरीक्षण में क्या देखा गया गुलाब चंद कटारिया ने गोशाला में उपलब्ध सुविधाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें इंसीनेरेटर (दाह संस्कार) सुविधा, पशुओं के लिए आश्रय, स्वच्छता, हरा और सूखा चारा, पेयजल, पशु चिकित्सा सेवाएं और अपशिष्ट निपटान शामिल थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि पशुओं को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके। राज्यपाल ने कहा कि इंसीनेरेटर तकनीकी खराबी के कारण बंद था और नगर निगम को इसे जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मृत पशुओं का वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निपटान किया जा सके। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए कि हर गोशाला में तैनात कर्मचारियों और उनके कार्यों की जानकारी प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित की जाए, ताकि पारदर्शिता बढ़ सके। इस अवसर पर चंडीगढ़ महापौर हरप्रीत कौर बबला, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, पशुपालन-सह-विशेष आयुक्त प्रदीप कुमार और शहर के विभिन्न गौसेवक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। प्रशासन का कहना है कि मृत पशुओं की संख्या, देखभाल और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गोशालाओं में नियमित निगरानी और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।