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जांच में खामियों के बाद अदालत ने कहा अभियोजन के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद अजीत झा मोहाली 19 Jan ।आर्मी अधिकारी कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके बेटे के साथ कथित मारपीट के मामले में अब कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। मोहाली स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने इस प्रकरण में पंजाब पुलिस के पांच अधिकारियों को मुकदमे का सामना करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट और जांच में उजागर हुई गंभीर चूकों के आधार पर लिया गया। अदालत ने इंस्पेक्टर रौनी सिंह, इंस्पेक्टर हैरी बोपराई, इंस्पेक्टर हरजिंदर सिंह ढिल्लों, इंस्पेक्टर शामिंदर सिंह और कांस्टेबल जय सिंह को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत तलब किया है। कोर्ट का कहना है कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। सीबीआई की जांच के मुताबिक यह घटना उस समय हुई, जब कर्नल बाठ अपने पुत्र के साथ दिल्ली से पटियाला जा रहे थे। रात करीब सवा बारह बजे हरबंस ढाबे के पास उनकी गाड़ी को गलत दिशा से आए वाहनों ने रोक लिया। इसके बाद हुए विवाद में कथित तौर पर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने दोनों पर हमला किया और वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। चार्जशीट में राजिंदरा अस्पताल, पटियाला और एम्स द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। मेडिकल दस्तावेजों के अनुसार, कर्नल बाठ को गंभीर चोटें आई थीं, जो हमले की गंभीरता को दर्शाती हैं। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में पटियाला पुलिस की प्रारंभिक जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। एजेंसी के अनुसार, 14 मार्च 2025 को पीड़ित अधिकारी ने हमलावरों के नामों के साथ विस्तृत बयान दिया था, लेकिन स्थानीय पुलिस ने इसे एफआईआर के बजाय केवल डेली डायरी में दर्ज किया। इसके उलट, पहली एफआईआर ढाबा मालिक के बयान पर दर्ज की गई, जिससे मामले की दिशा ही बदल गई। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि अहम सीसीटीवी फुटेज समय पर जब्त नहीं की गई, कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण में देरी हुई और कई जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया। सीबीआई का आरोप है कि एक सेवारत आर्मी अधिकारी से जुड़े गंभीर मामले में निष्पक्षता से जांच नहीं की गई। अदालत ने सभी पहलुओं, गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद स्पष्ट किया कि आरोपित पुलिस कर्मियों के खिलाफ ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।