Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
पसीने के साथ बह रहा खून, 2020 से अब तक 12 खिलाड़ियों की जा चुकी है जान अजीत झा. चंडीगढ़ 21 दिसंबर : कभी पंजाब के गांवों में कबड्डी का अखाड़ा शान, सम्मान और परंपरा का प्रतीक हुआ करता था। दंगल में इनाम के तौर पर देसी घी, गेहूं की बोरियां, भैंस या ट्रैक्टर मिलते थे और जीतने वाला खिलाड़ी पूरे गांव का हीरो बन जाता था। तब कबड्डी सिर्फ ताकत, हिम्मत और इज्जत का खेल थी। लेकिन वक्त के साथ इस पारंपरिक खेल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। आज कबड्डी अखाड़े में पसीने के साथ खून भी बह रहा है। गैंगस्टरों की दखलअंदाजी ने इस खेल को वर्चस्व और दहशत की जंग में बदल दिया है। जैसे-जैसे कबड्डी में पैसा बढ़ा, वैसे-वैसे गैंगस्टरों की नजर भी इस खेल पर पड़ती गई। हालात यह हैं कि अब कई इलाकों में गैंगस्टर तय करते हैं कि कौन सा खिलाड़ी किस क्लब के लिए खेलेगा। जो खिलाड़ी उनकी शर्तें मानने से इनकार करता है, उसे धमकी से लेकर हत्या तक का सामना करना पड़ रहा है। खेल से जुड़े लोगों का कहना है कि कबड्डी खिलाड़ियों की शारीरिक ताकत और गांवों में उनकी लोकप्रियता गैंगस्टरों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई है। इन्हीं खिलाड़ियों के सहारे अपराधी गिरोह ग्रामीण इलाकों में अपनी धाक जमाना चाहते हैं। 2010-11 से बदली कबड्डी की तस्वीर कबड्डी में बड़े पैमाने पर बदलाव की शुरुआत 2010-11 में मानी जाती है, जब पहली बार वर्ल्ड कबड्डी कप का आयोजन हुआ और विजेता टीम को एक करोड़ रुपये का इनाम मिला। टीवी कवरेज, अंतरराष्ट्रीय मंच और बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी ने इस खेल को गांव की चौपाल से निकालकर ग्लैमर और पैसे की दुनिया में पहुंचा दिया। इसका असर सीधा गांवों के टूर्नामेंटों पर पड़ा। • कपूरथला के भोलाथ में एक टूर्नामेंट में महज दो दिन में 3.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए।आज हालात यह हैं कि एक खिलाड़ी एक ही दिन में कई बुलेट मोटरसाइकिलें जीत लेता है।पंजाब के टॉप 30 खिलाड़ी एक सीजन में एक करोड़ रुपये से ज्यादा कमा रहे हैं।करीब 150 खिलाड़ी 40–50 लाख रुपये की सालाना कमाई कर रहे हैं। अनुभवी खिलाड़ी और आयोजक मानते हैं कि कबड्डी के लिए मजबूत और एकीकृत सिस्टम कभी खड़ा ही नहीं हो पाया।डोपिंग जांच,खिलाड़ियों की फिटनेस,मैचों की पारदर्शिता,समयबद्ध प्रतियोगिताएं | इन सभी मोर्चों पर गंभीर लापरवाही रही। कई बार खिलाड़ी लगातार रात-रात भर खेलने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी सेहत और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ता है। इसी कमजोर व्यवस्था का फायदा गैंगस्टरों ने उठाया। गैंगस्टर संस्कृति की इस घुसपैठ का सबसे खौफनाक चेहरा खिलाड़ियों की मौतें हैं।2020 से अब तक 12 कबड्डी खिलाड़ी अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल के मामलों में:मोहाली में कबड्डी खिलाड़ी राणा बलाचौरिया की हत्या ,लुधियाना (समराला) में गुरविंदर सिंह , लुधियाना में तेजपाल, नवंबर 2024 में सुखविंदर सिंह सोनी , इससे पहले संदीप सिंह नंगल अंबिया और अरविंदर जीत सिंह पड्डा जैसे नाम शामिल हैं | इन हत्याओं ने पूरे पंजाब में कबड्डी खिलाड़ियों के बीच डर का माहौल बना दिया है। फिर भी गांवों में जिंदा है कबड्डी इन तमाम खतरों के बावजूद कबड्डी की जड़ें आज भी पंजाब के गांवों में मजबूत हैं। यह खेल अब भी युवाओं को पहचान, रोजगार और सम्मान देता है। कई गांवों में बच्चों और महिलाओं के लिए अलग प्रतियोगिताएं शुरू हो चुकी हैं। बुजुर्गों का कहना है कि कबड्डी ने गांवों को हमेशा जोड़े रखा है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और खेल संस्थाएं समय रहते इस खेल को गैंगस्टरों की गिरफ्त से बचा पाएंगी, या अखाड़ा यूं ही खूनी मैदान बना रहेगा?