Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
अजीत झा. चंडीगढ़। सेक्टर-34 थाना क्षेत्र में दर्ज बीफ से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी नूर मोहम्मद को कोई राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की दलीलें प्रथम दृष्टया विश्वसनीय नहीं हैं और कानून से बचने की कोशिश प्रतीत होती हैं। मामले के अनुसार, 19 अगस्त 2025 को पुलिस ने सेक्टर-34 इलाके में एक्टिवा सवार नूर मोहम्मद को जांच के दौरान रोका था। तलाशी में उसके पास से करीब 50 किलो संदिग्ध मांस बरामद हुआ। आरोपी मांस से संबंधित कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया। शुरुआती स्तर पर सैंपल जांच के लिए भेजे गए और बाद में आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया। लैब रिपोर्ट आने के बाद पुष्टि हुई कि बरामद मांस बीफ था। इसके बाद पुलिस ने केस में धारा 299 जोड़ते हुए पंजाब प्रोविजन अधिनियम और पंजाब प्रोहिबिशन ऑफ काऊ स्लॉटर एक्ट की धारा 8 के तहत कार्रवाई की। अधिनियम के तहत नोटिस जारी होने पर आरोपी ने अंतरिम जमानत की मांग की, जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि यह तर्क कि आरोपी को मांस के बीफ होने की जानकारी नहीं थी, अंतिम समय में जिम्मेदारी से बचने का प्रयास लगता है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सरकारी पक्ष और शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि गाय हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में पूजनीय है और ऐसे मामलों से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। साथ ही आशंका जताई गई कि आरोपी बीफ की अवैध बिक्री से जुड़े किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में दी जाने वाली राहत है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी।