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अजीत झा. चंडीगढ़ 26 Jan : यूटी चंडीगढ़ की साइबर क्राइम पुलिस ने संगठित साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार कर अहम सफलता हासिल की है। इससे पहले दर्ज एफआईआर नंबर 150 दिनांक 26.12.2025 (धारा 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस) के तहत अब तक कुल चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।यह कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम, यूटी चंडीगढ़ सुश्री गीतांजलि खंडेलवाल (आईपीएस) के नेतृत्व में, डीएसपी साइबर क्राइम ए. वेंकटेश के मार्गदर्शन तथा इंस्पेक्टर इरम रिज़वी, एसएचओ, साइबर क्राइम थाना सेक्टर-17 की निगरानी में की गई। पकड़े गए आरोपी की पहचान दिल्ली के सुशील कौशिक के रूप में हुई हैं | यह मामला सेक्टर-45 चंडीगढ़ निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया था | शिकायतकर्ता को एक अज्ञात महिला द्वारा व्हाट्सएप और फोन कॉल के माध्यम से संपर्क किया गया, जिसने खुद को अमेरिकन एक्सप्रेस क्रेडिट कार्ड विभाग की प्रतिनिधि बताया। आरोपी महिला ने एसबीआई क्रेडिट कार्ड को अमेरिकन एक्सप्रेस कार्ड में बदलने और क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर शिकायतकर्ता को एक फर्जी गूगल फॉर्म लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित किया। लिंक पर क्लिक करते ही शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली गई, जिसके बाद उसके एसबीआई क्रेडिट कार्ड से ₹1,73,463 की धोखाधड़ी कर ली गई। जांच के दौरान सीएएफ, सीडीआर, आईएमईआई ट्रैकिंग और बैंक खातों के विश्लेषण से सामने आया कि यह साइबर ठगी गिरोह दिल्ली के अशोक नगर क्षेत्र से कई मोबाइल नंबरों और फर्जी दस्तावेजों पर खोले गए बैंक खातों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। 7 जनवरी 2026 को पुलिस ने तिलक नगर, पश्चिम दिल्ली स्थित अशोक नगर क्षेत्र में छापेमारी कर एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। इस दौरान तीन महिला आरोपियों प्रतिमा, रोशनी और जूही सेठी को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 4 लैपटॉप, 28 मोबाइल फोन,82 सिम कार्ड,55 एटीएम कार्ड,आधार और पैन कार्ड,बैंक पासबुक, चेकबुक,पीड़ितों की संपर्क सूची और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के खुलासे और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 22 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार में एक और छापेमारी की गई। इस दौरान होटल श्रीविद्या पीठ, हरिद्वार से आरोपी सुशील कौशिक को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सुशील कौशिक ने कबूल किया कि वह फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था, जिन्हें कॉल सेंटर फ्रॉड में इस्तेमाल किया जाता था। उसने बताया कि वह ये खाते और सिम कार्ड मुख्य कॉल सेंटर संचालक अजय सिंह मान को पैसों के बदले सप्लाई करता था। पुलिस अब गिरोह के अन्य सहयोगियों की पहचान, सरगना की गिरफ्तारी, फर्जी दस्तावेजों से खोले गए अन्य बैंक खातों और सिम कार्डों की जांच, ठगी गई रकम की बरामदगी तथा देशभर में पीड़ितों की संख्या का पता लगाने में जुटी है। साइबर क्राइम पुलिस की जनता से अपील • बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां कभी भी व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल के जरिए लिंक भेजकर कार्ड अपग्रेड या लिमिट बढ़ाने को नहीं कहतीं। • किसी भी कॉलर पर भरोसा न करें जब तक आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर से पुष्टि न हो जाए। • ओटीपी, सीवीवी, कार्ड विवरण या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। • अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। • किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन-शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें। • साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। • वरिष्ठ नागरिकों और परिवार के सदस्यों को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में जागरूक करें।