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लुधियाना | 4 फरवरी : नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (NITMA) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते का स्वागत किया है। इस समझौते के तहत अमेरिकी बाज़ार में भारतीय वस्त्र एवं परिधान उत्पादों पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में फिर से मज़बूत बढ़त मिलने की उम्मीद है। NITMA के अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ खन्ना ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल को देते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और अमेरिका के साथ सफल कूटनीतिक सहयोग के परिणामस्वरूप यह ऐतिहासिक समझौता संभव हो सका है। यह करार भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए दीर्घकालिक स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेगा। भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अगस्त 2025 से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारी दबाव में था, जिससे मुनाफ़ा घटा और वैश्विक सोर्सिंग पैटर्न प्रभावित हुआ। नए समझौते के तहत 18 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में 2 प्रतिशत की लागत बढ़त मिलेगी, जिन पर वर्तमान में 20 प्रतिशत शुल्क लागू है। इससे अमेरिका के ब्रांड्स और रिटेलर्स के लिए भारत एक पसंदीदा सोर्सिंग डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा। उद्योग और रोज़गार को नई ऊर्जा NITMA के अनुसार यह समझौता घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में तुरंत सकारात्मक प्रभाव डालेगा: उत्पादन क्षमता में वृद्धि: जिन कारखानों में उत्पादन घट गया था, वे पुनः पूर्ण क्षमता पर लौट सकेंगे। रोज़गार सुरक्षा: लाखों श्रमिकों की नौकरियाँ सुरक्षित होंगी तथा श्रम-प्रधान क्षेत्रों और MSME सेक्टर में नए रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। निवेश को प्रोत्साहन: व्यापार अनिश्चितता समाप्त होने से PM MITRA पार्क जैसी बड़ी परियोजनाओं में घरेलू एवं विदेशी निवेश (FDI) को गति मिलेगी। अपने समापन वक्तव्य में श्री खन्ना ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय बाज़ारों में प्राथमिक पहुँच मिलने से भारत अब एक स्थिर, भरोसेमंद और अत्यंत प्रतिस्पर्धी वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य, जो कभी दूर का सपना लगता था, अब पूरी तरह साकार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि NITMA नीति-निर्माताओं और निर्यातकों के साथ मिलकर इस कूटनीतिक सफलता को सतत औद्योगिक समृद्धि में बदलने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।