Uturn Time
Breaking
Chandigarh: भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण वर्ग चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न पश्चिम बंगाल में जनादेश 2026- सत्ता का नया सवेरा -9 मई 2026 रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती: नई सरकार का शपथ ग्रहण -कई गंभीर चुनौतियां Testing Agin Zirakpur: तेज आंधी ने बढ़ाया खतरा, हाईवे पर उड़ती शीट से हड़कंप Zirakpur: बलटाना में लगातार वारदातें, बुजुर्ग से छीनी सोने की चेन zirakpur: युवक-युवती और दुकानदार में झड़प, शिवालिक विहार में माहौल तनावपूर्ण Chandigarh: कारोबारियों के लिए राहत, राइट टू बिजनेस मॉडल पर काम शुरू Chandigarh: चंडीगढ़ घटना पर कानूनी जंग तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यूटी प्रशासन Ghaziabad: लुधियाना से CS हरदीप सिंह ने गाज़ियाबाद कार्यशाला में लिया भाग Chandigarh: मान सरकार पर हमले तेज, जाखड़ ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात Panchkula: वार्ड-7 बना चुनावी हॉटस्पॉट, प्रेम कुमार ने झोंकी पूरी ताकत Panchkula: तीन शहरों के लिए जीवनदान, पंचकूला में बना ग्रीन कॉरिडोर
Logo
Uturn Time
रिपोर्ट : अमनजीत सिंह जम्मू, 06 फरवरी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज चल रहे बजट सत्र के दौरान विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया। सदन के नेता के रूप में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की और भाजपा, पीडीपी सहित अन्य विपक्षी सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों को सख्ती से खारिज किया। सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने 2 फरवरी को विधानसभा को संबोधित करने और सरकार का व्यापक एजेंडा प्रस्तुत करने के लिए उपराज्यपाल का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि एलजी का अभिभाषण सरकार के अतीत, वर्तमान और भविष्य को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि केवल अभिभाषण ही पूरा बजट सत्र नहीं होता। उन्होंने कहा, “बजट प्रस्तुत किया जाना है, बजट पर कई मुद्दों पर चर्चा होगी और उसके बाद अनुदानों से संबंधित कार्यवाही होगी,” और यह भी रेखांकित किया कि सत्र के दौरान कई अवसर ऐसे आएंगे जब सरकार अपना एजेंडा जनता के सामने रखेगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्यपाल या राष्ट्रपति का अभिभाषण हर वर्ष पहले सत्र में होता है और उसे बार-बार दोहराया नहीं जाता। उन्होंने बताया कि सरकार ने जानबूझकर पिछले दो उपराज्यपाल अभिभाषणों में शामिल बिंदुओं को दोहराने से परहेज किया, ताकि विपक्ष यह आरोप न लगा सके कि कुछ नया नहीं दिया गया। हालांकि उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार जनता से किए गए वादों, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “उपराज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष के पास कम कहने को है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र पर अधिक,” और हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि घोषणापत्र विपक्ष के हमलों का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी सरकार पहले वर्ष में सभी वादे पूरे नहीं कर सकती, क्योंकि बुनियाद और तैयारी में समय लगता है। उन्होंने पिछली सरकारों द्वारा किए गए लंबे समय से लंबित वादों का उल्लेख किया, जैसे कि किश्तवाड़ में पानी की कमी दूर करने के लिए प्रस्तावित सुरंग परियोजना, जो 12 वर्षों बाद भी अधूरी है। 200 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपनी विश्वसनीयता को लेकर पूरी तरह सजग है और इसकी शुरुआत मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही कर दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत इस लाभ को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि मैं नए प्रोजेक्ट शुरू करूंगा, मैंने कहा था कि मैं आपको बिजली दूंगा। बिजली देने के कई तरीके होते हैं।” उन्होंने बताया कि पहले यह योजना एएवाई परिवारों के लिए शुरू की गई है और वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ अन्य वर्गों तक इसका विस्तार किया जाएगा। राज्य के दर्जे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा जनता से किया गया सबसे बड़ा वादा ही राज्य का दर्जा बहाल करना था, लेकिन बार-बार आश्वासन देने के बावजूद यह अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने जम्मू को कश्मीर से अलग करने की बातों और अविश्वास पैदा करने वाले बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं, क्योंकि कश्मीर के आम लोग शांति और देश के खिलाफ नहीं हैं और उन्होंने पहलगाम जैसी घटनाओं के दौरान पर्यटकों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक कुर्बान की है। 1947 से अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस के बलिदानों को याद करते हुए उन्होंने कश्मीर का प्रसिद्ध नारा दोहराया: “होशियार खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार।” उन्होंने विभाजनकारी राजनीति से सावधान रहने की अपील की और लद्दाख की स्थिति का उल्लेख करते हुए इसके परिणामों पर विचार करने को कहा। उन्होंने सवाल किया कि यदि राज्य का दर्जा पूरी तरह हिंसा की समाप्ति से जोड़ा जा रहा है, तो हालिया आतंकवादी घटनाओं, बम धमाकों और पर्यटकों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में कहा गया था कि अनुच्छेद 370 हटाने से अलगाववाद, आतंकवाद और भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा, लेकिन 2026 में भी ये समस्याएं जारी हैं। जम्मू से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब जनता के सामने रखने के लिए कुछ नहीं होता, तब भेदभाव की बात की जाती है। उन्होंने दरबार मूव को रद्द किए जाने को जम्मू के साथ सबसे बड़ा धोखा बताया, जिसे उनकी सरकार ने ठीक किया। उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू और कश्मीर के बीच संतुलित विकास के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है और विश्वविद्यालयों, कृषि विश्वविद्यालयों तथा केंद्रीय संस्थानों की स्थापना का उल्लेख किया। बंद पड़े मेडिकल कॉलेज के संबंध में उन्होंने सुझाव दिया कि उसे अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाए, ताकि लगभग 300 करोड़ रुपये का निवेश व्यर्थ न जाए और डॉक्टरों का निर्माण जारी रह सके। उन्होंने कहा, “डॉक्टर धर्म नहीं देखते,” और संस्था को दोबारा शुरू करने की अपील की। अंत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एकीकरण केवल भाषणों, योजनाओं या गिरफ्तारियों से नहीं होता। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “वास्तविक एकीकरण दिल जीतकर ही संभव है।”