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रिपोर्ट : अमनजीत सिंह जम्मू, 06 फरवरी उपराज्यपाल ने देश में हो रहे गहरे आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण पर प्रकाश डाला, जो समाज में एक नई चेतना का संचार कर रहा है। पूज्य संतों के आशीर्वाद से लोग एक आधुनिक और परिवर्तित भारत के निर्माण के संकल्प की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं: एलजी सिन्हा अनादि काल से हमारी परंपरा सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की पक्षधर रही है। इसने हमें वसुधैव कुटुम्बकम्—“संपूर्ण विश्व एक परिवार है”—की विराट दृष्टि प्रदान की है: एलजी हमारे पूर्वजों द्वारा सहस्राब्दियों पूर्व प्रतिपादित मूल्य आज वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे हैं। विश्व के अनेक राष्ट्र शांति और सद्भाव के पथप्रदर्शक के रूप में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को अपना रहे हैं: एलजी सिन्हा हमारी प्राचीन संस्कृति ने कभी विभाजन नहीं किया, बल्कि सदैव एकता, व्यक्तिगत आनंद और सर्वजन समृद्धि का समर्थन किया है। हमने अध्यात्म, सर्वकल्याण और विश्व-कल्याणकारी राष्ट्रवाद को नई परिभाषा दी है। भारत—विश्व की सबसे उन्नत सभ्यता और संस्कृति की जन्मभूमि—संपूर्ण विश्व में स्थायी शांति और सद्भाव का मार्गदर्शन करेगा: एलजी आज पूरा विश्व भारत की सॉफ्ट पावर और उसकी आध्यात्मिक संपदा को स्वीकार करता है और उसका सम्मान करता है। योग और ध्यान विश्व के कोने-कोने में घर-घर की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं: एलजी सिन्हा मेरा विश्वास है कि लंबे संघर्षपूर्ण सफर के बाद हम ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर पहुँचे हैं, जहाँ भारत को एक बार फिर विश्व का मार्गदर्शन करना होगा: एलजी मुझे पूर्ण विश्वास है कि एकता की शक्ति और उसकी भावना भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगी और हम अपनी प्राचीन गौरवशाली विरासत तथा विश्व में अपने उचित स्थान को पुनः प्राप्त करेंगे: एलजी सिन्हा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने गुरुवार को देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के विग्रह स्थापना समारोह में भाग लिया। यह आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सद्गुरु स्मृति समारोह, जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने देश में हो रहे व्यापक आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की चर्चा की, जो समाज में एक नई चेतना का संचार कर रहा है। “पूज्य संतों के आशीर्वाद से लोग एक आधुनिक और परिवर्तित भारत के निर्माण के संकल्प की ओर निरंतर अग्रसर हैं,” उपराज्यपाल ने कहा। उपराज्यपाल ने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा सहस्राब्दियों पूर्व कल्पित मूल्य आज वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए जा रहे हैं और अनेक देश वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को शांति और सौहार्द के प्रतीक के रूप में अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, “अनादि काल से हमारी परंपरा सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की समर्थक रही है। हमारी संस्कृति ने कभी विभाजन नहीं किया, बल्कि सदैव एकता, व्यक्तिगत सुख और सर्वजन समृद्धि का समर्थन किया है। हमने अध्यात्म, सर्वकल्याण और विश्व के लिए राष्ट्रभक्ति को नई परिभाषा दी है। भारत—विश्व की प्राचीनतम और समृद्ध सभ्यता का केंद्र—दुनिया में स्थायी शांति और सद्भाव का मार्गदर्शन करेगा।” उपराज्यपाल ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सॉफ्ट पावर को स्वीकार कर रहा है। योग और ध्यान आज वैश्विक जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट पुरातात्विक स्थलों के विकास, मठ-मंदिरों के संरक्षण, बौद्ध सर्किट कॉरिडोर तथा आध्यात्मिक धरोहरों के डिजिटल अभिलेखन जैसे परिवर्तनकारी कदमों का प्रावधान करता है। ये पहलें युवाओं में सांस्कृतिक गौरव को प्रोत्साहित करेंगी और भारत की एकता को और सुदृढ़ करेंगी। “लंबे संघर्ष के बाद हम ऐसे निर्णायक क्षण पर पहुँचे हैं, जहाँ भारत को पुनः विश्व का मार्गदर्शन करना है। मुझे विश्वास है कि एकता की शक्ति भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाएगी और हम अपनी प्राचीन गरिमा तथा वैश्विक स्थान को पुनः प्राप्त करेंगे,” उपराज्यपाल ने कहा। इस समारोह में बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक संत, आध्यात्मिक गुरु, धार्मिक संगठनों के प्रमुख एवं स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के अनुयायी उपस्थित रहे।