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मनीमाजरा के नगला मोहल्ला पार्क में आवारा कुत्तों का आतंक; बच्चे और बुजुर्ग घरों में कैद होने को मजबूर
अजीत झा. चंडीगढ़ 07 Feb : चंडीगढ़ नगर निगम की अनदेखी और प्रशासनिक सुस्ती ने मनीमाजरा के नागला मोहल्ला पार्क को नरक में तब्दील कर दिया है। जहाँ बच्चों को खेलना चाहिए और बुजुर्गों को शुद्ध हवा लेनी चाहिए, वहाँ आज आवारा कुत्तों के खूंखार झुंडों का राज है। यह कड़े शब्द समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने पार्क की बदहाली और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहे। नगला मोहल्ला स्थित सार्वजनिक पार्क इस समय स्थानीय निवासियों के लिए मनोरंजन की जगह नहीं, बल्कि डर का केंद्र बन चुका है। पार्क में कुत्तों के बड़े-बड़े झुंडों के जमावड़े और उनके आपसी झगड़ों के कारण क्षेत्र के बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना दूभर हो गया है। ​राजबीर सिंह भारतीय ने सीधे तौर पर नगर निगम चंडीगढ़ को चेतावनी देते हुए कहा कि पार्क में आवारा कुत्तों की तादाद इतनी बढ़ गई है कि वे आपस में तो लड़ते ही हैं, राह चलते मासूम बच्चों और लाचार बुजुर्गों पर भी झपटने को तैयार रहते हैं। ​समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि पार्क में हर समय कुत्तों के झुंड आपस में लड़ते रहते हैं, जिससे वहां टहलने आने वाले बुजुर्गों और खेलने वाले बच्चों पर हमले का खतरा बना रहता है। ​बच्चों पर खतरा: छोटे बच्चे जो पार्क में खेलने आते हैं, वे इन कुत्तों के आसान शिकार बन सकते हैं। ​मुख्य चिंताएं और मांगें: ​सुरक्षा का अभाव: पार्क में कुत्तों के हिंसक व्यवहार के कारण बुजुर्गों ने वहां सुबह-शाम की सैर बंद कर दी है। ​क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है? राजबीर सिंह ने पूछा कि क्या प्रशासन तभी जागेगा जब कोई कुत्ता किसी बच्चे को बुरी तरह नोच लेगा? पार्क में कुत्तों के आतंक के कारण बुजुर्गों ने टहलना छोड़ दिया है। क्या सार्वजनिक संपत्तियां अब इंसानों के लिए नहीं बल्कि जानवरों के लिए रह गई हैं? ​फंड का दुरुपयोग: कुत्तों की नसबंदी और प्रबंधन के नाम पर खर्च होने वाला पैसा कहाँ जा रहा है? धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। मनीमाजरा के पार्क आज जंग के मैदान बन चुके हैं जहाँ कुत्तों के झुंड एक-दूसरे के खून के प्यासे रहते हैं। ऐसे माहौल में कोई अभिभावक अपने बच्चे को पार्क भेजने की हिम्मत कैसे करे? यदि प्रशासन ने 24 इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो हमें स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर कड़ा रुख अपनाना होगा।" ​प्रशासनिक अनदेखी: नगर निगम और संबंधित विभाग को बार-बार सूचित करने के बावजूद कुत्तों की नसबंदी या उन्हें वहां से हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।जब पार्क ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम नागरिक कहां जाएगा? कुत्तों की बढ़ती तादाद और उनके हिंसक रवैये ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। ​राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नागला मोहल्ला पार्क से इन आवारा कुत्तों को हटाने या इनके उचित प्रबंधन की व्यवस्था की जाए ताकि स्थानीय निवासी भयमुक्त होकर पार्क का उपयोग कर सकें। राजबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही इन कुत्तों को पकड़ने या पार्क से हटाने की कार्रवाई शुरू नहीं हुई, शांति पूर्वक अंदोलन करने पर मजबूर होंगे। पर तो जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।