Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
जीरकपुर 15 March : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, संगमधाम, #4A पार्वती एन्क्लेव, बलटाना में रविवार को एक विशेष आध्यात्मिक क्लास का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बी.के. डॉ. प्रमोद कुमार ने उपस्थित भाई-बहनों को राजयोग और आत्म-जागरूकता के माध्यम से जीवन को संतुलित और सुखमय बनाने के सूत्र बताए। बी.के. डॉ. प्रमोद कुमार एक प्रख्यात राजयोग मेडिटेशन टीचर, इमोशनल इंटेलिजेंस स्पीकर, होलिस्टिक वेलनेस एक्सपर्ट, उद्यमी और मेंटर हैं। वे ग्रेटर नोएडा स्थित दिव्य वेलनेस के संस्थापक भी हैं और देश-विदेश में लोगों को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच तथा आत्म-सशक्तिकरण के लिए प्रेरित करते रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज अधिकांश तनाव मनुष्य की सोच और दृष्टिकोण के कारण उत्पन्न होता है। यदि हम दूसरों की कमियों के बजाय उनके गुणों को देखने की आदत विकसित करें, तो रिश्तों में स्वतः ही मधुरता आ जाती है। उन्होंने बताया कि क्रोध या नकारात्मकता अक्सर हमारी अपनी प्रतिक्रिया होती है, इसलिए मन और बुद्धि को नियंत्रित करने के लिए राजयोग ध्यान का नियमित अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को “मेरा-मेरा” की भावना से ऊपर उठकर सेवा और श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाना चाहिए। सेवा की भावना से किया गया कार्य ही सच्ची खुशी और संतुष्टि प्रदान करता है। उन्होंने नियमित रूप से मुरली सुनने, अमृतवेला में योग करने और सात्विक जीवनशैली अपनाने पर भी बल दिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कठिन परिस्थितियाँ भी व्यक्ति के विकास का अवसर बन सकती हैं। सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक अभ्यास से हर समस्या का समाधान संभव है। इस अवसर पर केंद्र के अनेक भाई-बहनों ने कार्यक्रम में भाग लिया और राजयोग के आध्यात्मिक सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।