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हलवारा एयरपोर्ट अब केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा का मुद्दा बन चुका है, जहां “काम किसने किया” से ज्यादा “श्रेय किसे मिलेगा” की लड़ाई तेज हो गई है।
लुधियाना/चंडीगढ़ : हलवारा एयरपोर्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया है। कैबिनेट मंत्री संजेव अरोड़ा और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच बयानबाजी ने इसे एक स्पष्ट “क्रेडिट वॉर” का रूप दे दिया है, जिसमें दोनों नेता इस महत्वपूर्ण परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे भविष्य की सियासी रणनीति भी छिपी है। लुधियाना, जो पंजाब का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, वहां हलवारा एयरपोर्ट का शुरू होना एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट से जुड़ा श्रेय सीधे तौर पर राजनीतिक लाभ में तब्दील हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, संजीव अरोड़ा द्वारा “अवसरवादी” शब्द का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति है, जिसके जरिए वे खुद को इस परियोजना का मुख्य सूत्रधार साबित करना चाहते हैं और साथ ही विरोधियों की भूमिका को कमतर दिखाना चाहते हैं। वहीं, रवनीत सिंह बिट्टू भी इस मुद्दे पर सक्रिय रहकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी और प्रभाव बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि लंबे समय से लंबित रहे हलवारा एयरपोर्ट के संचालन को लेकर अब जब सकारात्मक प्रगति दिख रही है, तो सभी पक्ष इसे अपने-अपने पक्ष में भुनाने में जुट गए हैं। विकास परियोजनाओं को लेकर इस तरह की सियासत भारतीय राजनीति में नई नहीं है, जहां उपलब्धियों का श्रेय लेना अक्सर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गर्मा सकता है, खासकर तब जब एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें शुरू हो जाएंगी। ऐसे में जनता के बीच यह धारणा बनाना कि इस उपलब्धि के पीछे किस नेता की प्रमुख भूमिका रही, राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होगा।