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लेखक: अमनजीत सिंह जम्मू–कश्मीर के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में प्रैक्टिस करने वाली प्रख्यात अधिवक्ता एवं उत्तर कश्मीर के बारामुला ज़िले के सिंहपोरा गांव की गौरवशाली बेटी डॉ. सुखबीर कौर बाजवा को कानून और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए शिकागो ओपन यूनिवर्सिटी, अमेरिका द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान अमेरिका में आयोजित एक भव्य दीक्षांत समारोह के दौरान प्रदान किया गया। समारोह के दौरान डॉ. बाजवा पारंपरिक अकादमिक गाउन और कैप में दिखाई दीं, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त मानद डॉक्टरेट प्रमाणपत्र, प्रशंसा पत्र तथा स्वर्ण ट्रॉफी गर्वपूर्वक धारण की। इसके अतिरिक्त उन्हें मेडल ऑफ ऑनर से भी सम्मानित किया गया, जो उनके कानूनी और सामाजिक कार्यों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है। समारोह के दौरान प्रदर्शित प्रशस्ति-पत्र (साइटेशन) के अनुसार, विश्वविद्यालय ने डॉ. बाजवा की समर्पित कानूनी प्रैक्टिस, संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विशेष रूप से वंचित और हाशिये पर रह रहे वर्गों के लिए सामाजिक न्याय की निरंतर वकालत की सराहना की। यह सम्मान कानून के शासन को सुदृढ़ करने और सीमाओं से परे न्याय को प्रोत्साहित करने में उनकी भूमिका को मान्यता देता है। देश की सर्वोच्च अदालत में एक विशिष्ट करियर बनाने वाली डॉ. सुखबीर कौर बाजवा अपनी निडर कानूनी आवाज़ और पेशेवर ईमानदारी के लिए जानी जाती हैं। उत्तर कश्मीर के एक छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच तक का उनका सफर, विशेषकर संघर्ष-प्रभावित और ग्रामीण क्षेत्रों की युवा महिलाओं के लिए एक सशक्त प्रेरणा है। सम्मान प्राप्त करने के बाद अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए डॉ. बाजवा ने यह पुरस्कार जम्मू–कश्मीर की जनता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सिंहपोरा, बारामुला से जुड़ी उनकी जड़ों ने ही उनके मूल्यों और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को आकार दिया है। उन्होंने कानूनी जागरूकता, मानवाधिकारों और सामाजिक समानता के लिए निरंतर कार्य करते रहने का अपना संकल्प दोहराया। इस उपलब्धि से उत्तर कश्मीर में हर्ष और उत्साह का माहौल है। कानूनी विशेषज्ञों, नागरिक समाज के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है। डॉ. सुखबीर कौर बाजवा को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उत्कृष्टता को रेखांकित करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर जम्मू-कश्मीर की बेटियों की बौद्धिक और पेशेवर क्षमता को भी उजागर करता है।