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चंडीगढ़/यूटर्न/4 अप्रैल। ईसीएचएस ESHS से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ट्राईसिटी में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के ठिकानों पर छापेमारी की। देर रात तक चली इस कार्रवाई में जांच एजेंसी को फर्जी बिल, जाली टेस्ट रिपोर्ट और अन्य अहम दस्तावेज मिले हैं, जिनके आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मरीजों के इलाज के नाम पर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। सीबीआई को ऐसे कई मामले मिले हैं, जहां सामान्य मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर पर भर्ती दिखाकर भारी-भरकम बिल बनाए गए। इतना ही नहीं, एक ही मरीज को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती दिखाने और कुछ मामलों में ऐसे मरीजों के नाम पर बिल बनाने के भी सबूत मिले हैं, जो कभी अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए। जांच के दौरान सेक्टर-38 स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर से फर्जी स्टाम्प, डिजिटल सिग्नेचर और एडिट की गई मेडिकल रिपोर्ट्स बरामद की गई हैं। बताया जा रहा है कि पुरानी रिपोर्ट्स में बदलाव कर नई रिपोर्ट तैयार की जाती थीं, जिसके लिए मोटी रकम वसूली जाती थी। सीबीआई ने इस सेंटर की हार्ड डिस्क को भी कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। इस घोटाले में ‘मंथन हेल्थ केयर’ नाम की एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जो ट्राईसिटी के अस्पतालों को ईसीएचएस योजना के तहत मरीज उपलब्ध करवाती थी। एजेंसी से जुड़े डॉक्टरों से पूछताछ की जा रही है। आरोप है कि अस्पतालों को मरीज रेफर करने के बदले कमीशन लिया जाता था। जांच की आंच धर्म, माओ, इंडस, शेल्बी, केयर और अमर जैसे कई निजी अस्पतालों तक पहुंची है। सीबीआई अब उन सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का रिकॉर्ड खंगाल रही है, जो इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह नेटवर्क सिर्फ ट्राईसिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में फैला हुआ है। जांच एजेंसी यह भी परख रही है कि जिन बीमारियों के नाम पर अस्पतालों को भुगतान किया गया, क्या मरीज वास्तव में उन बीमारियों से ग्रस्त थे या नहीं। सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और खुलासे और संभावित गिरफ्तारियां हो सकती हैं।