हरियाणा के करनाल में हुए कथित एनकाउंटर मामले की जांच अब स्टेट क्राइम ब्रांच करेगी। मुख्यमंत्री नायब सैनी के निर्देश के बाद एफआईआर नंबर 282 को जिला पुलिस से क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। एडीजीपी कानून-व्यवस्था संजय कुमार के नेतृत्व में जांच होगी। मामले को लेकर रोर समुदाय में नाराजगी थी और 24 अगस्त को करनाल में महापंचायत का ऐलान किया गया था।
चंडीगढ़: हरियाणा के करनाल में हुए कथित एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच करेगी।
सरकार के निर्देश के बाद 7 अगस्त को करनाल के मधुबन थाने में आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR नंबर 282 को तत्काल प्रभाव से जिला पुलिस से स्टेट क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है।
ADGP के नेतृत्व में होगी जांच
मामले की जांच हरियाणा के ADGP (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार के नेतृत्व में की जाएगी।
आदेश के मुताबिक, पुलिस महानिरीक्षक (क्राइम) एक अधिकारी नियुक्त करेंगे। संबंधित अधिकारी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद करनाल पुलिस से केस की पूरी फाइल और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेगा।
करनाल के पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश दिया गया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड क्राइम ब्रांच द्वारा नियुक्त अधिकारी को सौंपे जाएं।
24 अगस्त को प्रस्तावित थी महापंचायत
एनकाउंटर को लेकर अखिल भारतीय रोर महासभा में लगातार नाराजगी बढ़ रही थी। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर 24 अगस्त को करनाल में महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया था।
इन मांगों में हर्ष और एक अन्य व्यक्ति की कथित मुठभेड़ की जांच भी शामिल थी। सरकार द्वारा अब जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के बाद इस फैसले को मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
7 अगस्त की मुठभेड़ के बाद उठे सवाल
बताया गया है कि 7 अगस्त को करनाल में सदर बाजार क्षेत्र के वीरू वाल्मीकि की कथित हत्या के मामले में पुलिस मुठभेड़ हुई थी। इसी कार्रवाई में हर्ष और मटरवा खेड़ी गांव निवासी बीरबल के मारे जाने की बात सामने आई थी।
वीरू की कथित तौर पर 5 अगस्त को भगवारिया गैस एजेंसी के पास बाइक सवार दो लोगों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों की तलाश शुरू की थी।
समुदाय ने की थी CBI जांच की मांग
हर्ष के एनकाउंटर के बाद रोर समुदाय में नाराजगी बढ़ गई थी। 12 अगस्त को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित कर समुदाय के प्रतिनिधियों ने कथित एनकाउंटर की CBI जांच, मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और एनकाउंटर से पहले कथित टिप्पणियों को लेकर करनाल विधायक जगमोहन आनंद के इस्तीफे की मांग की थी।
इसके बाद 13 अगस्त को समुदाय के प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी।
CM ने मांगा था 16 अगस्त तक का समय
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण और पुंडरी विधायक सतपाल जांबा भी मौजूद थे।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनने के बाद स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों का हवाला देते हुए मांगों पर विचार करने के लिए 16 अगस्त तक का समय मांगा था।
महापंचायत से पहले सरकार का बड़ा फैसला
समय-सीमा बीतने के बाद ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर मंगलवार को करनाल की रोर धर्मशाला में समुदाय की बैठक हुई। आगे की रणनीति तय करने के लिए 65 सदस्यीय समिति बनाई गई और 24 अगस्त को करनाल में महापंचायत का ऐलान किया गया।
इसके बाद मंगलवार देर रात सरकार ने मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपने का आदेश जारी कर दिया।
अब क्राइम ब्रांच की जांच से खुलेगा मुठभेड़ का सच
सरकार के इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसी एनकाउंटर से जुड़े घटनाक्रम, दर्ज FIR, पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करेगी। क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि 7 अगस्त की मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया क्या थी।