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चंडीगढ़/यूटर्न/10 अप्रैल। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा, जो 'घर पर नकदी' विवाद को लेकर लोकसभा में चल रही जांच का सामना कर रहे हैं, ने भारत के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने कहा, बड़े दुख के साथ, मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज के पद से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा देता हूं। इस्तीफे की चिट्ठी की एक कॉपी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भेजी गई है। इस्तीफे की चिट्ठी में, जस्टिस वर्मा ने कहा कि वह अपने इस्तीफे के कारणों से राष्ट्रपति के गरिमामय पद पर कोई बोझ नहीं डालना चाहते। उन्होंने आगे कहा कि इस पद पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात थी। यह इस्तीफा उस समय आया जब लोकसभा समिति द्वारा उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर शुरू की गई जांच चल रही थी। पिछले साल बनी थी तीन सदस्यों की समिति पिछले साल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जजों (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक समिति बनाई थी। यह जांच उनके सरकारी आवास पर कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिलने के मामले में की जा रही थी। इस समिति के सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, और कर्नाटक हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील वासुदेव आचार्य शामिल हैं। लोकसभा के 146 सदस्यों द्वारा जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने इस जांच समिति का गठन किया था। सार्वजनिक विवाद बनकर सामने आया इस घटना के सामने आने के बाद जब यह एक बड़ा सार्वजनिक विवाद बन गया, तो तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने तीन जजों की एक आंतरिक जांच समिति बनाई। इस समिति में जस्टिस शील नागू, जस्टिस जी.एस. संधावालिया, और जस्टिस अनु सिवरमन शामिल थे। जांच पूरी होने तक जस्टिस वर्मा को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया था और उनसे न्यायिक कार्य वापस ले लिया गया था। समिति ने मई में सीजेआई खन्ना को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें पहली नज़र में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया गया था। जब जस्टिस वर्मा ने सीजेआई की इस्तीफ़ा देने की सलाह नहीं मानी, तो सीजेआई ने आगे की कार्रवाई के लिए यह रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी। सार्वजनिक पारदर्शिता की दिशा में एक कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आग की घटना से जुड़ी रिपोर्टें और दस्तावेज़, जिनमें जलते हुए कैश की तस्वीरें और वीडियो भी शामिल थे, वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आंतरिक जाँच और साथ ही उन्हें पद से हटाने की सीजेआई की सिफ़ारिश को चुनौती दी थी। इसके बाद, जस्टिस वर्मा ने एक और याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने जाँच समिति गठित करने के लोकसभा स्पीकर के फ़ैसले को चुनौती दी थी। इस साल की शुरुआत में, कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया। ----