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मेजर अली ज़ीरकपुर 06 Jan : नगर परिषद ज़ीरकपुर की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। मंगलवार देर शाम करीब 6 बजे नगर परिषद के कर्मचारियों ने कोहिनूर ढाबे के सामने नगर परिषद की सड़क के किनारे खड्डे भरने का कार्य शुरू कर दिया। यह समय शहर का सबसे व्यस्त समय माना जाता है, जब दफ्तरों की छुट्टी के बाद लोगों का आवागमन चरम पर होता है। बिना किसी पूर्व ट्रैफिक प्लानिंग और सुरक्षा इंतजामों के शुरू किए गए इस कार्य ने पटियाला लाइट प्वाइंट से लेकर कोहिनूर ढाबे तक लंबा जाम लगा दिया। शाम के व्यस्त समय में अचानक सड़क किनारे काम शुरू होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि कई एंबुलेंस और स्कूली वाहनों को भी जाम में फंसना पड़ा। ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी में राहगीरों को खुद ही सड़क पर उतरकर यातायात नियंत्रित करना पड़ा। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि नगर परिषद की यह लापरवाही रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। लोगों का आरोप है कि बिना सूचना बोर्ड, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन के इस तरह का काम सीधे तौर पर जनता की परेशानी बढ़ाता है। एक राहगीर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम रोज काम से लौटते हैं, लेकिन नगर परिषद को जनता की सुविधा की कोई चिंता नहीं। शाम के समय सड़क खोदना मतलब जानबूझकर जाम लगवाना।” वहीं रोहित दुकानदार ने कहा, “जाम की वजह से ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पाए। पूरा बाजार ठप हो गया, नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा?” लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद को सड़क मरम्मत या खड्डे भरने का कार्य करना ही था, तो यह काम रात के समय या ट्रैफिक कम होने के दौरान किया जाना चाहिए था। बॉक्स प्लंबर से लिया जा रहा राजमिस्त्री का काम इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने नगर परिषद ज़ीरकपुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि यहां प्लंबर से राजमिस्त्री का काम करवाया जा रहा है। इससे न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि बिना तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशिक्षित कर्मचारियों के इस तरह का काम भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे सकता है। बॉक्स राहगीरों के सवाल— क्या यही सही समय था? राहगीरों ने नगर परिषद से सवाल किया कि क्या खड्डे भरने के लिए यही समय चुना गया था? यदि काम जरूरी था, तो रात के समय या ट्रैफिक कम होने पर क्यों नहीं किया गया। लोगों ने मांग की है कि नगर परिषद को कार्य शुरू करने से पहले ट्रैफिक पुलिस और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। इस मामले में नगर परिषद का पक्ष जानने के लिए खबर लिखे जाने तक शाम 7:36 बजे कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनता को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।