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घग्गर में डीसिल्टिंग की आड़ में रेत लूट, प्रशासन की आंखों के सामने चल रहा खेल - Uturn Time
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घग्गर नदी में नियमों की धज्जियां, सरकार-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल नदी बचाने के नाम पर मीनिंग माफिया सक्रिय, प्रशासन बना मूकदर्शक घग्गर के बहाव से खिलवाड़, डीसिल्टिंग नहीं अवैध रेत मीनिंग का खेल पाइप डालकर रोका घग्गर का बहाव, सरकार की नाक के नीचे रेत का कारोबार जीरकपर 11 Jan : डेराबस्सी के पास से गुजरती घग्गर नदी में डीसिल्टिंग (नदी की सफाई) के नाम पर चल रहा रेत मीनिंग का कारोबार इन दिनों सरकार और प्रशासन के लिए बड़े सवाल खड़े कर रहा है। नदी का बहाव सुधारने और गाद निकालने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस कार्य में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिल्ट हटाने की आड़ में कीमती रेत निकाली जा रही है और यह सब कुछ प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है। मौके पर हालात यह हैं कि घग्गर नदी के बीचों-बीच बड़े-बड़े पाइप डालकर अस्थायी रास्ता बनाया गया है। इन पाइपों के ऊपर मिट्टी और रेत डालकर कच्ची सड़क तैयार की गई है, ताकि पोकलेन और जेसीबी मशीनें नदी के अंदर तक जाकर रेत निकाल सकें। नदी से निकलने वाली रेत को टिप्परों में भरकर दिन-रात बाहर भेजा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि न तो मौके पर कोई कांटा (वजन तौलने की व्यवस्था) लगाया गया है और न ही किसी प्रकार की पर्ची काटी जा रही है, जिससे मीनिंग के सरकारी रिकॉर्ड पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डीसिल्टिंग के नाम पर नदी की प्राकृतिक संरचना से छेड़छाड़ की जा रही है। पानी के नैचुरल फ्लो को रोककर पाइप डालना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे भविष्य में बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं। लोगों का आरोप है कि रोजाना प्रशासनिक अधिकारी इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन कोई भी इस अवैध गतिविधि पर ध्यान नहीं दे रहा। बॉक्स-1 क्या है डीसिल्टिंग का नियम डीसिल्टिंग का उद्देश्य नदी से गाद (मिट्टी) निकालकर बहाव को सुचारू करना होता है। नियमों के अनुसार नदी के बहते पानी को रोका नहीं जा सकता। नदी के भीतर स्थायी या अस्थायी सड़क बनाना प्रतिबंधित है। केवल सीमित और नियंत्रित मशीनों का उपयोग किया जाना चाहिए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि वास्तव में केवल सिल्ट निकाली जा रही होती, तो रेत से भरे भारी टिप्पर दिन-रात इलाके से बाहर नहीं जाते। लोगों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से यह पूरा कारोबार फल-फूल रहा है। नदी के बीच बनाए गए अस्थायी रास्ते की वजह से पानी का बहाव कई जगहों पर रुक गया है, जिससे आसपास के इलाकों में जलभराव की आशंका बढ़ गई है। बॉक्स-2: मौके पर क्या दिखा घग्गर नदी के बीच में बड़े पाइप डालकर अस्थायी सड़क पोकलेन और जेसीबी मशीनों से रेत की खुदाई बिना कांटा और बिना पर्ची के रेत से भरे टिप्पर नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट इलाके के लोगों ने इस मामले को लेकर सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन होता, तो इस तरह खुलेआम रेत मीनिंग संभव नहीं थी। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की हाई लेवल जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कोटस स्थानीय निवासी रुस्तम “डीसिल्टिंग के नाम पर नदी से कीमती रेत निकाली जा रही है। दिन-रात टिप्पर चल रहे हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।” जब इस मामले को लेकर एसडीएम डेराबस्सी अमित गुप्ता से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि घग्गर नदी के बहाव में पाइप डालकर डीसिल्टिंग नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक नदी के बहते पानी को रोकना गलत है और यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। कोटस अमित गुप्ता, एसडीएम डेराबस्सी “नियमों के अनुसार नदी के बहाव को रोका नहीं जा सकता। पाइप डालकर डीसिल्टिंग करना नियमों के खिलाफ है। यदि ऐसी कोई शिकायत है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, जब माइनिंग विभाग के एसडीओ रमनदीप सिंह से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि नियमों के तहत इस तरह का रास्ता बनाया जा सकता है और यह सारा काम घग्गर नदी से गाद निकालने के लिए किया जा रहा है। कोटस रमनदीप सिंह, एसडीओ माइनिंग “यह कार्य नियमों के अनुसार किया जा रहा है। नदी से केवल गाद निकाली जा रही है और इसके लिए अस्थायी रास्ता बनाया गया है।” हालांकि, अधिकारियों के बयानों और जमीनी हकीकत के बीच साफ विरोधाभास दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन नियमों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नदी के भीतर भारी मशीनों से रेत मीनिंग जारी है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में कब तक आंखें मूंदे रहते हैं या फिर घग्गर नदी के प्राकृतिक अस्तित्व को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है। कोटस इस बारे में जब के परिंदे जगदीप धालीवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा की पोकलेन मशीन चला सकते हैं हमारे पास परमिशन है पर आपको परमिशन सरकार से लेनी पड़ेगी हम आपको परमिशन नहीं दिखा सकते और उन्होंने कहा कि के हम गलत होते तो हमारे ऊपर पर्चा ना दे देता प्रशासन