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कलायत | रवि जैस्ट: क्षेत्र के गांव बात्ता की नाथवान पट्टी में स्थित ‘पीथे वाला’ तालाब अब ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन चुका है। वर्षों से सफाई और निकासी न होने के कारण तालाब का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भर गया है। हालात इतने बदतर हैं कि बस स्टैंड से सजुमा रोड को जोड़ने वाली मुख्य गली अब जोहड़ का रूप ले चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की उपेक्षा के चलते उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या कोई नई नहीं बल्कि करीब 10 साल पुरानी है। स्थानीय निवासी एडवोकेट सुल्तान सिंह गोल्डी, जगदीश, सुभाष और विनोद ने बताया कि जब वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सांसद थे, तब उन्होंने गांव में आकर समस्या के समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी आज तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। घुटनों तक पानी, बच्चों के लिए खतरा तालाब से निकला गंदा पानी गलियों में जमा होने से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है। कीचड़ और जलभराव से बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। इसी रास्ते से दर्जनों बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, जिन्हें घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। गर्मियों में किसान किसी तरह तालाब के पानी का उपयोग सिंचाई में कर लेते हैं, लेकिन सर्दियों में यही तालाब ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन जाता है। घर से निकलना, बच्चों को स्कूल भेजना और रोजमर्रा का काम करना तक मुश्किल हो गया है। हाईवे जाम की चेतावनी ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे नेशनल हाईवे जाम करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रशासन का आश्वासन इस मामले पर बीडीपीओ कलायत रितु ने कहा, “गांव बात्ता का मामला मेरे संज्ञान में है। ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए जल्द ही ग्राम पंचायत के साथ बैठक कर पानी की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि लोगों को राहत मिल सके।” ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए। ‘पीथे वाला’ तालाब कब तक गांव को डुबोता रहेगा, इसका जवाब प्रशासन को जल्द देना होगा।