इंदौर नगर निगम में कथित फर्जी टेंडर और वर्क ऑर्डर के जरिए करीब 103 करोड़ रुपये की सरकारी राशि को अपराध की आय बनाने के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की विशेष पीएमएलए अदालत ने कारोबारी राहुल बडेरा और तत्कालीन अधिकारी अभय सिंह राठौर की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए 21 सितंबर को संज्ञान संबंधी सुनवाई तय की है।
इंदौर (Naren Danu) : इंदौर नगर निगम के कथित 103 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कारोबारी राहुल बडेरा और नगर निगम के तत्कालीन अधिकारी अभय सिंह राठौर को अदालत से राहत नहीं मिली। ईडी की विशेष पीएमएलए अदालत ने बुधवार को दोनों की पहली जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) राजेंद्र कुमार पाटीदार ने दोनों मामलों में सुनवाई के बाद कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से आरोपितों के खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़े आरोप सामने आते हैं। इस स्तर पर यह मानने के पर्याप्त आधार नहीं हैं कि दोनों अपराध के दोषी नहीं हैं।
फर्जी टेंडर से सरकारी रकम निकालने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में दावा किया कि इंदौर नगर निगम में आरोपितों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से फर्जी टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी किए। इन आदेशों के माध्यम से सरकारी राशि निकाली गई और कथित तौर पर आपस में बांटकर करीब 103 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय तैयार की गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जिन कार्यों के लिए टेंडर जारी किए गए, उनमें से वास्तविक रूप से कोई काम नहीं कराया गया। ईडी ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए दोनों आरोपितों की जमानत का विरोध किया।
31 आरोपितों के खिलाफ दाखिल हो चुका है परिवाद
ईडी ने जांच पूरी करने के बाद 24 जुलाई 2026 को मामले में 31 आरोपितों के खिलाफ पीएमएलए की धारा 3 सहपठित धारा 4 के तहत परिवाद पेश किया था। मामले में संज्ञान से संबंधित बहस के लिए अदालत ने 21 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
राहुल बडेरा को ईडी ने 1 जून 2026 को गिरफ्तार किया था। उसकी ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसने जांच में सहयोग किया, जांच पूरी हो चुकी है और परिवाद भी दाखिल हो गया है। इसलिए अब हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदन ऐरन ने इन दलीलों का विरोध किया।
पीएमएलए की धारा 45 का हवाला
अदालत ने जमानत पर फैसला सुनाते हुए पीएमएलए की धारा 45 और उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि जमानत के स्तर पर आरोपित को यह दिखाना होता है कि प्रथम दृष्टया वह अपराध का दोषी नहीं है और रिहाई के बाद उसके दोबारा अपराध में शामिल होने की संभावना नहीं है।
अदालत ने मामले में कथित आर्थिक अपराध की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और उनके सामाजिक प्रभाव को देखते हुए राहुल बडेरा को जमानत देने से इनकार कर दिया।
अधिकारी पर भी मिलीभगत का आरोप
अभय सिंह राठौर की ओर से कहा गया कि वह नगर निगम के ड्रेनेज विभाग में इंजीनियर था और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। बचाव पक्ष ने जांच पूरी होने और लंबे समय से हिरासत में होने का हवाला देकर जमानत की मांग की।
ईडी ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पद पर रहते हुए राठौर ने अन्य आरोपितों के साथ मिलकर फर्जी टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी करने में भूमिका निभाई तथा सरकारी राशि के कथित बंटवारे में भी शामिल रहा। एजेंसी ने आशंका जताई कि रिहाई की स्थिति में वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों में कथित अपराध से अर्जित रकम से खरीदी गई अचल संपत्तियों और आरोपितों के बैंक खातों में जमा धनराशि का विवरण भी पाया। इन तथ्यों और पीएमएलए की धारा 45 के प्रावधानों के आधार पर अदालत ने राठौर की जमानत याचिका भी खारिज कर दी।
मामले में अब 21 सितंबर को अभियोजन की अनुमति, परिवाद और संज्ञान से संबंधित बहस होगी।