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अजीत झा. चंडीगढ़ 23 Feb :.स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ में स्वच्छता व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर के विभिन्न सेक्टरों और कॉलोनियों में कचरा उठाने के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि घरों के पानी के बिल में पहले से कचरा संग्रहण शुल्क शामिल होने के बावजूद डोर-टू-डोर कलेक्शन करने वाले कर्मचारी हर महीने अलग से ₹100 की मांग कर रहे हैं।हल्लोमाजरा निवासी अरविन्द सिंह ने कहा कि पैसा नहीं देने पर कूड़ा उठाने से इनकार कर दिया जाता है, जिससे हल्लोमाजरा में गंदगी फैल रही है और लोग मजबूरन भुगतान कर रहे हैं। पानी के बिल में पहले से जुड़ा है शुल्क शहर में डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन का जिम्मा म्युनिसिपल कारपोरेशन चंडीगढ़ के अधीन है। निगम द्वारा जारी पानी के बिल में कचरा प्रबंधन शुल्क पहले से जोड़ा जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों द्वारा अतिरिक्त राशि मांगना नियमों के विरुद्ध है। अरविन्द सिंह ने आरोप लगाया कि यह वसूली सिस्टम का हिस्सा” बन चुकी है और कई क्षेत्रों में नियमित रूप से हो रही है। “₹100 नहीं दिए तो कचरा नहीं उठेगा” सेक्टरों और कॉलोनियों के लोगों का कहना हैं कि कचरा गाड़ी के कर्मचारी साफ शब्दों में कहते हैं कि यदि अलग से ₹100 नहीं दिए गए तो अगले दिन से कूड़ा नहीं उठाया जाएगा। स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया हम पहले ही बिल में भुगतान कर रहे हैं। फिर यह अलग से पैसे क्यों? मना करो तो दो-दो दिन कचरा नहीं उठाते। इस वजह से कई जगहों पर सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लगने लगे हैं, जिससे दुर्गंध और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। जॉइंट कमिश्नर को शिकायत जांच की मांग मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों ने औपचारिक शिकायत म्युनिसिपल कारपोरेशन चंडीगढ़ के जॉइंट कमिश्नर को सौंप दी है। शिकायत में अवैध वसूली की जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी मिलेंगे। प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शहर स्वच्छता रैंकिंग और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बड़े दावे कर रहा है। यदि पानी के बिल में शामिल शुल्क के बावजूद अलग से वसूली हो रही है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़ा करता है | वही निगम अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ सकता है और संबंधित ठेकेदार/कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई अनिवार्य होगी।