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बच्चों के वजन का 10% से ज्यादा नहीं होगा बस्ता, स्कूलों पर सख्त निगरानी
अजीत झा. चंडीगढ़ 28 Feb । शहर में स्कूली बच्चों के भारी बस्तों को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। अब किसी भी छात्र का स्कूल बैग उसके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्देशों के मुताबिक स्कूल अब विद्यार्थियों पर गाइड बुक, अतिरिक्त रेफरेंस बुक या अनावश्यक वर्कबुक नहीं थोप सकेंगे। केवल स्वीकृत सिलेबस में निर्धारित पाठ्य-पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। हर पखवाड़े होगी बैग की जांच आदेश के अनुसार प्रत्येक स्कूल में ‘स्कूल बैग मॉनिटरिंग कमेटी’ गठित करना अनिवार्य होगा, जिसकी अध्यक्षता स्कूल प्रमुख करेंगे। कमेटी हर पंद्रह दिन में कम से कम एक बार छात्रों के बैग का वजन जांचेगी और उसका रिकॉर्ड लिखित रूप में सुरक्षित रखेगी।स्कूलोंको टाइम-टेबल इस तरह तैयार करना होगा कि छात्रों को एक ही दिन में सभी विषयों की किताबें लाने की जरूरत न पड़े। अभिभावकों की भी होगी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे अभिभावकों को भी निर्धारित मानकों की जानकारी दें। माता-पिता से अपील की गई है कि वे बच्चों के बैग में अनावश्यक सामग्री न रखें।सभी स्कूलों को सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है। आदेशों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। 🔹 प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक: होमवर्क नहीं दिया जाएगा। गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर रहेगा और न्यूनतम किताबें रखी जाएंगी। कक्षा-वार दिशा-निर्देश 🔹 कक्षा 3 से 5 तक: विषय के अनुसार सीमित किताबें लानी होंगी। 🔹 कक्षा 6 से 8 तक: रोजाना बोझ कम करने के लिए विषय-वार टाइम-टेबल लागू करना अनिवार्य होगा। 🔹 कक्षा 9 से 12 तक: जहां संभव हो, लॉकर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और तर्कसंगत शेड्यूल अपनाया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों को कक्षाओं में शेल्फ या लॉकर की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, ताकि विद्यार्थियों को रोजाना सभी किताबें घर से लाने की आवश्यकता न पड़े। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला बच्चों की सेहत, खासकर रीढ़ और कंधों से जुड़ी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।