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New Delhi 3 Mar : आज दुनिया भर में मोबाइल भुगतान से लेकर टिकटिंग और रिटेल तक हर जगह इस्तेमाल होने वाला क्यूआर (QR) कोड कभी सिर्फ ऑटोमोबाइल फैक्ट्रियों की जरूरत था। लेकिन इसके आविष्कारक मासाहिरो हारा और उनकी कंपनी के एक अहम फैसले ने इसे वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली तकनीक बना दिया। 1990 के दशक की शुरुआत में मासाहिरो हारा जापान की कंपनी डेंसो वेव (Denso Wave) में कार्यरत थे, जो टोयोटा समूह की सहायक कंपनी है। उस समय ऑटो पार्ट्स फैक्ट्रियों में हजारों पुर्जों को तेजी से ट्रैक करने की चुनौती थी। पारंपरिक बारकोड में सीमित जानकारी स्टोर होती थी, जिससे एक ही पुर्जे के लिए कई बार स्कैन करना पड़ता था। यह प्रक्रिया धीमी, त्रुटिपूर्ण और उत्पादन में बाधा उत्पन्न करने वाली थी। इसी समस्या का समाधान खोजते हुए हारा ने 1994 में क्यूआर कोड विकसित किया। यह एक दो-आयामी (2D) मैट्रिक्स कोड था, जो हजारों अक्षरों की जानकारी संग्रहित कर सकता था। इसे किसी भी कोण से स्कैन किया जा सकता था और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर भी यह पढ़ा जा सकता था। अब कई स्कैन की जगह एक ही स्कैन पर्याप्त था। क्यूआर कोड के पेटेंट डेंसो वेव के पास थे, लेकिन कंपनी ने इसे मुफ्त उपयोग के लिए खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। न कोई लाइसेंस शुल्क और न ही कोई रॉयल्टी। कंपनी का मानना था कि यदि इसके उपयोग पर शुल्क लगाया जाता, तो इसका प्रसार सीमित रह जाता। खुला उपयोग सुनिश्चित कर उन्होंने इसे एक वैश्विक मानक बना दिया। आज क्यूआर कोड मोबाइल पेमेंट, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ऑनबोर्डिंग, रिटेल और टिकटिंग जैसी अनेक सेवाओं की रीढ़ बन चुका है। एक दूरदर्शी निर्णय ने न केवल उद्योग जगत को सरल बनाया, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा भी दी।