Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
अकाल मृत्यु के बाद मोक्ष का पावन स्थल – पिहोवा में सदियों से जारी पिंडदान परंपरा
दलजीत अज्नोहा पिहोवा /हरियाणा : प्राचीन धार्मिक नगरी पिहोवा स्थित सरस्वती तीर्थ पर गंगाराम जी की गद्दी में आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं की गूंज आज भी सुनाई देती है। इसी पावन स्थल पर दीपक शास्त्री सरस्वती तीर्थ के मुख्य पुरोहित से वरिष्ठ पत्रकार दलजीत अज़नोहा ने विशेष भेंट कर यहां की प्राचीन परंपराओं, इतिहास और कर्मकांड की विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्य पुरोहित ने बताया कि यह तीर्थ स्थल आदिकाल से अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्तियों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां पिंडदान और श्राद्ध कर्म की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि यहां विधिवत कर्मकांड कराने से मृत आत्मा को गति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्री राम ने अपने पिता महाराज दशरथ की अकाल मृत्यु के पश्चात उनकी आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए इसी पवित्र तीर्थ पर श्राद्ध कर्म कराया था। यह उल्लेख रामायण की कथाओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। तभी से यहां पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा निरंतर चली आ रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस तीर्थ की विशेष महिमा के कारण यहां किए गए कर्मकांड का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान कृष्ण पांडवों को इस पावन स्थल पर लेकर आए थे, ताकि महाभारत युद्ध में मारे गए कौरवों की आत्मा की शांति हेतु विधिपूर्वक क्रिया-कर्म संपन्न कराया जा सके। यह प्रसंग महाभारत से जुड़ा हुआ माना जाता है, जिससे इस तीर्थ की महत्ता और भी बढ़ जाती है। आज भी जीवित है परंपरा मुख्य पुरोहित ने बताया कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कराने आते हैं। विशेष रूप से अमावस्या, पितृ पक्ष और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। वरिष्ठ पत्रकार दलजीत अज़नोहा ने कहा कि इस तीर्थ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बताया। पिहोवा का यह प्राचीन सरस्वती तीर्थ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हमारी पौराणिक विरासत और संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी है, जो आज भी श्रद्धा, विश्वास और परंपरा के साथ आगे बढ़ रही है।