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नई दिल्ली/यूटर्न/17 मार्च।भारत के डायरेक्ट टैक्स ढांचे में 1 अप्रैल, 2026 से कई अहम बदलाव लागू होंगे। इसके तहत, इनकम-टैक्स एक्ट, 2025, छह दशक पुराने इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की जगह ले लेगा। नया कानून आसान भाषा में पेश किया गया है और केंद्रीय बजट 2026 में घोषित प्रस्ताव इसमें वैसे ही बने रहेंगे। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इन बदलावों से नियमों का पालन करना आसान होगा, समय सीमा को तर्कसंगत बनाया जाएगा और टैक्स के कुछ ऐसे प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा जो निवेशकों, व्यवसायों और आम लोगों पर असर डालते हैं। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत एक मुख्य बदलाव 'टैक्स ईयर' (कर वर्ष) की अवधारणा की शुरुआत है। यह इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 के तहत 'पिछले वर्ष' और 'असेसमेंट ईयर' के बीच के पुराने अंतर को खत्म कर देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम का मकसद टैक्स ढांचे को आसान बनाना है, ताकि आय कमाने और उस पर टैक्स देने की अवधि को एक ही शब्दावली के तहत लाया जा सके। आम लोगों के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं नए कानून के तहत, आम लोगों के लिए इनकम टैक्स स्लैब की मौजूदा दरें - चाहे वे पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत हों या रियायती टैक्स व्यवस्था के तहत - वैसी ही बनी रहेंगी। इससे व्यक्तिगत टैक्स के बोझ में निरंतरता बनी रहेगी। एक और अहम बदलाव इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तय तारीखों में संशोधन से जुड़ा है। सरकार ने उन टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है जो किसी व्यवसाय या पेशे से जुड़े हैं और जिनके खातों का ऑडिट होना ज़रूरी नहीं है। साथ ही, ऐसी फर्मों के पार्टनर्स और कुछ ट्रस्टों के लिए भी यह समय सीमा बढ़ाई जाएगी। संशोधित ढांचे के तहत, इन टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न दाखिल करने की तय तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी जाएगी। हालांकि, जो लोग ITR-1 और ITR-2 जैसे आसान रिटर्न दाखिल करते हैं, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की तय तारीख 31 जुलाई ही बनी रहेगी। संशोधित तय तारीखों का ढांचा मोटे तौर पर इस प्रकार होगा: धारा 172 जैसे विशेष प्रावधानों के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 30 नवंबर; कंपनियों और उन टैक्सपेयर्स के लिए 31 अक्टूबर जिनके खातों का ऑडिट होना ज़रूरी है; ऐसे व्यवसायी या पेशेवर टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त जिनके खातों का ऑडिट होना ज़रूरी नहीं है; और बाकी सभी टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई। ये संशोधन इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होंगे, जबकि इसी तरह के प्रावधान मौजूदा कानून के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 1 मार्च, 2026 से भी प्रभावी होंगे। संशोधित रिटर्न फाइल करने की समय सीमा बढ़ाई गई नया कानून संशोधित रिटर्न फाइल करने की समय सीमा को भी बढ़ाएगा। अभी, टैक्सपेयर संबंधित टैक्स ईयर के खत्म होने के नौ महीने के अंदर या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, अपना रिटर्न संशोधित कर सकते हैं। नया ढांचा इस सीमा को टैक्स ईयर के खत्म होने से 12 महीने तक बढ़ाने का प्रस्ताव करता है। हालांकि, अगर संशोधित रिटर्न नौ महीने के बाद फाइल किया जाता है, तो फीस लगेगी। जहां कुल इनकम 5 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं है, वहां 1,000 रुपये की फीस देनी होगी, जबकि जहां इनकम 5 लाख रुपये से ज़्यादा है, वहां 5,000 रुपये की फीस लगेगी। फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT दरें बढ़ेंगी सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी और फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में बढ़ती सट्टेबाजी की गतिविधियों का हवाला देते हुए, सिक्योरिटीज ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) की दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी किया है। 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी संशोधित ढांचे के तहत, ऑप्शंस की बिक्री पर STT दर 0.10% से बढ़कर 0.15% हो जाएगी, जबकि ऑप्शंस की बिक्री पर टैक्स, जहां कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल किया जाता है, 0.125% से बढ़कर 0.15% हो जाएगा। फ्यूचर्स की बिक्री पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा। कई लेन-देन पर TCS दरें तर्कसंगत बनाई गईं बदलावों के एक और सेट में कुछ लेन-देन पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) दरों को तर्कसंगत बनाना शामिल है। इसका उद्देश्य टैक्स लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाना और इसे बदलते आर्थिक और अनुपालन संबंधी विचारों के अनुरूप बनाना है। इंसानों के इस्तेमाल के लिए शराब की बिक्री पर TCS दर 1% से बढ़कर 2% हो जाएगी, जबकि तेंदू पत्तों पर यह दर 5% से घटकर 2% हो जाएगी। कबाड़ और कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क जैसे खनिजों की बिक्री पर TCS दर 1% से बढ़कर 2% हो जाएगी। लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा या मेडिकल इलाज के लिए 10 लाख रुपये से ज़्यादा के रेमिटेंस पर, दर 5% से घटाकर 2% कर दी जाएगी। हालाँकि, दूसरे कामों के लिए किए गए रेमिटेंस पर 20% TCS लगता रहेगा। विदेश टूर पैकेज के मामले में, 10 लाख रुपये तक 5% TCS और उससे ज़्यादा पर 20% TCS का मौजूदा ढाँचा बदलकर, एक समान 2% की दर लागू की जाएगी। खास बात यह है कि मोटर गाड़ियों और दूसरी लक्ज़री चीज़ों की बिक्री पर TCS 1% ही रहेगा, सुरना ने बताया। एम्प्लॉयर द्वारा दिए गए आने-जाने के खर्च पर टैक्स नहीं लगेगा नया टैक्स कानून एम्प्लॉयर द्वारा घर से ऑफिस आने-जाने के लिए दी जाने वाली सुविधाओं पर मिलने वाली छूट का दायरा भी बढ़ाता है। पहले, एम्प्लॉयर द्वारा घर और काम की जगह के बीच आने-जाने के लिए दी गई गाड़ी की कीमत को टैक्सेबल सुविधा नहीं माना जाता था। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत, इस छूट में एम्प्लॉयर द्वारा आने-जाने पर किया गया कोई भी खर्च या उसकी भरपाई भी शामिल होगी, जिससे इस सुविधा का दायरा और बढ़ जाएगा।