शिकायतों के बावजूद जारी निर्माण, पार्किंग तक की जगह नहीं—अधिकारियों के दावे हवा हवाई
जीरकपुर 24 March :
जीरकपुर का बलटाना इलाका इन दिनों अवैध निर्माण का ऐसा अड्डा बन चुका है, जहां नियम-कानून केवल कागज़ों तक सीमित नजर आते हैं। गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक, हर तरफ बिना अनुमति के इमारतें खड़ी हो रही हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। सबसे चिंताजनक स्थिति उन दुकानों और कॉमर्शियल बिल्डिंग्स की है, जिन्हें इस तरह बनाया जा रहा है कि वहां पार्किंग के लिए एक साइकिल तक खड़ी करने की जगह नहीं छोड़ी गई। नतीजा सड़कों पर अतिक्रमण, जाम और आम लोगों के लिए भारी परेशानी। सवाल उठता है कि आखिर ऐसे नक्शे पास कौन कर रहा है, या फिर बिना मंजूरी के ही सब कुछ “मैनेज” हो रहा है?
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चार-चार मंजिला इमारतें, बिना मंजूरी के तैयार
बलटाना के कई हिस्सों में बिना नक्शा पास कराए चार-चार मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर परिषद की टीम मौके पर पहुंचती जरूर है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाकर लौट जाती है। नोटिस बना ‘औपचारिक हथियार’, निर्माण जारी अवैध निर्माण रोकने के लिए नोटिस भेजे जाते हैं, लेकिन इन नोटिसों का असर कहीं नजर नहीं आता। निर्माणकर्ता बेखौफ होकर काम जारी रखते हैं और इमारत पूरी भी कर लेते हैं। इसके बावजूद न तो सीलिंग होती है और न ही किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई।
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शिकायतें हुईं, फिर भी खड़ी हो गईं इमारतें
कई मामलों में तो निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने शिकायतें दर्ज करवाईं, लेकिन प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली के चलते अवैध निर्माण न केवल जारी रहा बल्कि पूरा भी हो गया। इससे यह साफ जाहिर होता है कि शिकायतों का भी कोई असर नहीं है। नालों के किनारे तक निर्माण, नियमों की उड़ाई धज्जियां नियमों के मुताबिक नालों के पास निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन बलटाना में नालों के बिल्कुल किनारे इमारतें खड़ी की जा रही हैं। यह न केवल अवैध है, बल्कि भविष्य में जलभराव और हादसों का बड़ा कारण भी बन सकता है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा।
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एसी कमरों में अधिकारी, मैदान में बेलगाम निर्माण
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि जमीन पर हालात पूरी तरह बेकाबू हैं। अवैध निर्माण करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर ही नहीं रह गया है।
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अधिकारियों के दावे बनाम जमीनी हकीकत
जब इस पूरे मामले पर कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी से सवाल किया जाता है, तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है—“अवैध निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
लेकिन बलटाना की सड़कों और गलियों में खड़ी होती अवैध इमारतें इस दावे की पोल खोलती नजर आती हैं।
कोट
उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार समय-समय पर अवैध निर्माणकर्ताओं को नोटिस निकले जाते हैं और कोर्ट केस भी लगाए जाते हैं।
पुनीत सिंगला
डीएम नगर परिषद जीरकपुर